Unnao Baba Milan Das हत्याकांड: उत्तर प्रदेश के Unnao जिले से एक बड़ी खबर सामने आई है, जिसने पूरे इलाके में हलचल मचा दी है। कुछ दिन पहले हुए साधु राममिलन दास उर्फ Baba Milan Das की बेरहमी से की गई हत्या के मामले में पुलिस ने बड़ा एक्शन लिया है। इस केस का जो मुख्य आरोपी था, जिसका नाम इसराइल था, वह पुलिस के साथ हुई एक मुठभेड़ में मारा गया है। इस घटना के बाद से इलाके में सुरक्षा व्यवस्था काफी कड़ी कर दी गई है और लोग इस पूरे मामले पर लगातार चर्चा कर रहे हैं। आइए जानते हैं कि आखिर यह पूरा मामला क्या था, यह विवाद कैसे शुरू हुआ और पुलिस ने इस कार्रवाई को कैसे अंजाम दिया।

कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद और क्या थी वजह?
यह पूरी घटना Unnao के बांगरमऊ कोतवाली इलाके की है। यहाँ के रहने वाले 45 वर्षीय संत राममिलन दास (जिन्हें लोग Baba Milan Das सिंह भी कहते थे) अपने घर से थोड़ी ही दूरी पर अपनी जमीन पर भगवान शिव का एक मंदिर बनवा रहे थे। इस मंदिर का काम पिछले लगभग 5 महीनों से चल रहा था। बाबा मिलन दास पांच भाइयों में सबसे छोटे थे और वह इस निर्माणाधीन मंदिर में नियमित रूप से पूजा-पाठ और भजन-कीर्तन किया करते थे।
परिजनों और स्थानीय लोगों के मुताबिक, इस मंदिर से कुछ ही दूरी पर एक मस्जिद भी स्थित है। आरोप है कि बाबा मिलन दास मंदिर में लाउडस्पीकर लगाकर भजन बजाते थे, और यही बात कुछ स्थानीय लोगों को पसंद नहीं आ रही थी। इसी लाउडस्पीकर और भजन बजाने को लेकर आरोपियों और बाबा के बीच नाराजगी चल रही थी।

बीती 9 जून की दोपहर को इसी बात को लेकर विवाद इतना बढ़ गया कि आरोपियों ने Baba Milan Das को एक अहाते में बुलाया। वहाँ मुख्य आरोपी इसराइल और उसके साथियों ने बाबा पर चाकुओं से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो बाबा अपनी जान बचाने के लिए अहाते के गेट की तरफ भागे भी, लेकिन हमलावरों ने उन्हें दौड़ा-दौड़ा कर मारा। गंभीर रूप से घायल बाबा को जब अस्पताल ले जाया गया, तो डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस घटना के बाद इलाके के लोग गुस्से में सड़क पर उतर आए थे और जाम लगा दिया था।
पुलिस ने मुख्य आरोपी को कैसे घेरा?
बाबा की हत्या के बाद से ही मुख्य आरोपी इसराइल फरार चल रहा था। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार दबिश दे रही थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्नाव के एसपी जयप्रकाश सिंह ने इसराइल पर एक लाख रुपए का इनाम भी घोषित कर दिया था। राजनीतिक गलियारों में भी इसकी गूंज थी; रविवार को ही उन्नाव के सांसद साक्षी महाराज ने बयान दिया था कि अगर आरोपी सरेंडर नहीं करेगा तो उसका एनकाउंटर तय है।
इसके ठीक अगले दिन, यानी सोमवार तड़के सुबह करीब 3:40 बजे पुलिस को एक पुख्ता सूचना मिली। मुखबिर ने बताया कि एक लाख का इनामी बदमाश इसराइल ताजपुर अंडरपास के पास देखा गया है और वह वहाँ किसी साथी का इंतजार कर रहा है। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और एसओजी (SOG) की टीम ने बिना वक्त गंवाए मौके पर पहुंचकर उसकी घेराबंदी शुरू कर दी।
जब पुलिस टीम ने इसराइल को चारों तरफ से घिरते देखा, तो उसे आत्मसमर्पण (सरेंडर) करने के लिए कहा गया। लेकिन उसने खुद को बचाने के लिए पुलिस टीम पर ही सीधे फायरिंग शुरू कर दी। इस गोलीबारी में एसओजी के एक सिपाही विकास भदौरिया घायल हो गए, जबकि दरोगा न्यूटन कुमार सिंह की बुलेटप्रूफ जैकेट पर गोली लगी, जिससे वह बाल-बाल बच गए। पुलिस ने भी आत्मरक्षार्थ जवाबी फायरिंग की, जिसमें इसराइल को गोली लग गई। पुलिस उसे तुरंत बांगरमऊ के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) लेकर गई, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

मुठभेड़ के बाद क्या चीजें बरामद हुईं?
इस मुठभेड़ के खत्म होने के बाद पुलिस ने घटनास्थल और आरोपी के पास से कुछ महत्वपूर्ण चीजें बरामद की हैं। पुलिस के अनुसार, इसराइल के पास से एक 315 बोर का देसी तमंचा, दो खोखा कारतूस और एक चाकू मिला है। सबसे अहम बात यह है कि पुलिस का दावा है कि उसके पास से वही चाकू बरामद हुआ है, जिससे उसने 9 जून को साधु राममिलन दास की हत्या की थी। पुलिस इन सभी चीजों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेज रही है ताकि कानूनी प्रक्रिया को पूरी तरह मजबूत किया जा सके।

क्या कहती है इसराइल की पोस्टमार्टम रिपोर्ट?
सोमवार दोपहर को डॉक्टरों की एक विशेष टीम ने इसराइल के शव का पोस्टमार्टम किया। इस टीम में डॉ. तौसीफ रिजवी और डॉ. पंकज वर्मा शामिल थे। पोस्टमार्टम की रिपोर्ट में जो बातें सामने आईं, उससे पता चलता है कि पुलिस और बदमाश के बीच दूरी कितनी थी।
रिपोर्ट के मुताबिक, इसराइल को जो गोली लगी, वह लगभग 4 से 5 मीटर की दूरी से चलाई गई थी। गोली उसके सीने में लगी और शरीर के आर-पार निकल गई। शरीर के अंदर कोई बुलेट (गोली का अग्रभाग) बरामद नहीं हुई है। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पुलिस ने कानूनी औपचारिकताएं निभाते हुए शव को इसराइल के परिजनों को सौंप दिया, जिसके बाद उसके भाई शव लेकर अपने घर रवाना हो गए।
शव घर पहुंचने पर गांव का माहौल कैसा है?
सोमवार देर शाम जब इसराइल का शव उसके पैतृक इलाके में पहुँचा, तो वहाँ का माहौल काफी गमगीन हो गया। शव को देखते ही उसके रिश्तेदारों, परिजनों और परिचितों की भारी भीड़ जमा हो गई। घर में चीख-पुकार मच गई और उसके परिवार के लोग रोने-बिलखने लगे।
अगर इसराइल की पृष्ठभूमि की बात करें, तो वह मूल रूप से बांगरमऊ कोतवाली के ततियापुर गांव का रहने वाला था, लेकिन पिछले 20 सालों से वह बांगरमऊ के मोहल्ला पुरबिया टोला में रह रहा था और वहाँ मजदूरी का काम करता था। उसके परिवार में उसकी पत्नी सईदा, तीन बेटे और दो बेटियां हैं। इसराइल के कुल 8 भाई थे, जिनमें से दो की मौत पहले ही बीमारी आदि के कारण हो चुकी है।
फिलहाल इस घटना के बाद से उसके घर पर ताला लटका हुआ है। गांव में किसी भी तरह का तनाव या कानून-व्यवस्था की स्थिति न बिगड़े, इसके लिए प्रशासन ने भारी मात्रा में पुलिस बल तैनात कर रखा है और अधिकारी खुद स्थिति पर नजर रखे हुए हैं।
इस केस में अब तक कितने आरोपी पकड़े गए?
Baba Milan Das के भाई वीरेंद्र सिंह की शिकायत पर पुलिस ने इस मामले में कुल 5 नामजद और 2-3 अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया था। नामजद आरोपियों की सूची में इसराइल के अलावा लल्ली उर्फ अजय गौतम, यामीन, शानू और मोहम्मद शफी के नाम शामिल थे।
पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए 11 जून को ही तीन आरोपियों—मोहम्मद शफी, लल्ली उर्फ अजय गौतम और यामीन को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। मुख्य आरोपी इसराइल फरार था, जो अब मुठभेड़ में मारा जा चुका है। वहीं, पांचवें फरार आरोपी शानू को भी बांगरमऊ कोतवाली पुलिस ने एक अन्य मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया है। इस तरह घटना के सभी मुख्य नामजद आरोपी या तो पकड़े जा चुके हैं या ढेर हो चुके हैं। पुलिस का कहना है कि वे अभी भी इस घटना से जुड़े अन्य सभी पहलुओं और अज्ञात लोगों की भूमिका की गहराई से जांच कर रहे हैं।
पीड़ित परिवार का क्या कहना है?
इस एनकाउंटर की खबर मिलने के बाद मृतक साधु के परिवार ने राहत की सांस ली है, लेकिन वे इसे एक बड़ी साजिश का हिस्सा मान रहे हैं। साधु के भाई राजेंद्र सिंह ने कहा कि पुलिस ने जो कार्रवाई की है, वह सही है और बाकी बचे आरोपियों के खिलाफ भी इसी तरह का कड़ा एक्शन होना चाहिए।
उनका आरोप है कि बाबा की हत्या अचानक नहीं हुई, बल्कि इसके पीछे एक सोची-समझी साजिश थी। आरोपी चाहते थे कि वहाँ मंदिर का निर्माण रुक जाए और भजन-कीर्तन की गतिविधियां पूरी तरह बंद हो जाएं। उन्होंने यह भी बताया कि मंदिर निर्माण के दौरान बाबा को लगातार धमकियां भी मिल रही थीं, लेकिन उन्होंने परिवार को इस बारे में इसलिए नहीं बताया ताकि घर में कोई डर का माहौल न बने। बाबा के दूसरे भाई वीरेंद्र सिंह ने भी पुलिस की इस कार्रवाई की तारीफ की है और मांग की है कि इस पूरे हत्याकांड के पीछे जो भी मास्टरमाइंड या मुख्य साजिशकर्ता हैं, उन्हें भी बेनकाब किया जाना चाहिए।
Unnao का यह पूरा घटनाक्रम दिखाता है कि कैसे एक छोटे से सामाजिक या धार्मिक विवाद को कुछ लोगों ने हिंसक मोड़ दे दिया, जिसका अंत बेहद दुखद रहा। एक तरफ जहाँ एक साधु को अपनी जान गंवानी पड़ी, वहीं दूसरी तरफ कानून हाथ में लेने वाले मुख्य आरोपी को भी अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। पुलिस ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए सभी आरोपियों को कानून के दायरे में ला खड़ा किया है। फिलहाल गांव में शांति है, लेकिन यह घटना इस बात की याद दिलाती है कि समाज में आपसी समझ और शांति बनाए रखना कितना जरूरी है ताकि ऐसी हिंसक घटनाओं को रोका जा सके।
