सुप्रीम कोर्ट में SIR प्रक्रिया की सुनवाई: चुनाव आयोग का संवैधानिक अधिकार और मतदाता सूची की पारदर्शिता

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सुप्रीम कोर्ट आज भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) द्वारा संचालित स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करेगा। इस मामले में विशेष रूप से बिहार, केरल और पश्चिम बंगाल के राज्य शामिल हैं, जहां विपक्ष ने SIR प्रक्रिया को लेकर आपत्ति जताई थी। सुप्रीम कोर्ट में दर्ज याचिकाओं में चुनाव आयोग के अधिकार, नागरिकता की पहचान और मतदान के अधिकार से जुड़े संवैधानिक मुद्दों पर बहस होने की संभावना है। इस सुनवाई की अध्यक्षता मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की पीठ कर रही है।

SIR: चुनाव आयोग का संवैधानिक अधिकार

6 जनवरी को हुई पूर्व सुनवाई में चुनाव आयोग ने कोर्ट को स्पष्ट किया था कि SIR कराने का पूरा संवैधानिक अधिकार आयोग को प्राप्त है। आयोग का कहना था कि वोटर लिस्ट में किसी भी विदेशी नागरिक का नाम न हो, यह सुनिश्चित करना उसकी संवैधानिक जिम्मेदारी है।

चुनाव आयोग ने यह भी कहा कि मतदाता सूची की पारदर्शिता और सटीकता सुनिश्चित करना उसकी मूल जिम्मेदारी है, और इसे राजनीतिक दलों के बयानों से प्रभावित नहीं किया जा सकता। आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने तर्क दिया कि संविधान के तहत राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और न्यायाधीश जैसे सभी संवैधानिक पदों के लिए भारतीय नागरिक होना अनिवार्य है।

TMC की याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई सुनवाई

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसदों द्वारा दायर याचिकाओं पर भारत निर्वाचन आयोग से जवाब तलब किया है। TMC ने आरोप लगाया है कि SIR प्रक्रिया राजनीतिक रूप से प्रभावित हो सकती है और इसमें कई मतदाताओं के अधिकारों का हनन हो सकता है।

चुनाव आयोग ने कोर्ट में यह स्पष्ट किया कि उसकी प्राथमिकता मतदाता सूची को सही और पारदर्शी बनाए रखना है। आयोग ने कहा कि राजनीतिक दलों के आरोपों या बयानबाजी पर प्रतिक्रिया देना उसका दायित्व नहीं है।

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मतदाता सूची और भारतीय नागरिकता का महत्व

चुनाव आयोग के वकील ने यह भी बताया कि भारत के संविधान में नागरिकता की भूमिका केंद्र में है। यह सुनिश्चित करना कि संवैधानिक पदों के लिए केवल योग्य भारतीय नागरिक ही चुनाव में भाग लें, चुनाव आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी है।

इसलिए, SIR प्रक्रिया के तहत विदेशी नागरिकों को मतदाता सूची से बाहर करना आयोग की प्राथमिकता है। आयोग का तर्क है कि यह न केवल कानून और संविधान के अनुरूप है, बल्कि इससे मतदाता सूची की सटीकता और निष्पक्षता भी सुनिश्चित होती है।

राजनीतिक दलों की आपत्तियों के बावजूद आयोग का रुख

चुनाव आयोग ने यह भी कहा कि उसे राजनीतिक दलों के दबाव या आपत्तियों से प्रभावित नहीं होना चाहिए। आयोग का मूल दायित्व है कि सभी योग्य भारतीय नागरिक ही मतदान कर सकें और कोई भी गैर-क़ानूनी मतदाता सूची में शामिल न हो।

इस मामले की सुनवाई से देश के चुनावी नियम और मतदाता सूची की पारदर्शिता पर महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश मिल सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला न केवल SIR प्रक्रिया पर असर डालेगा, बल्कि भविष्य में सभी राज्यों में मतदाता सूची की जांच और संशोधन के तरीके को भी प्रभावित करेगा।

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