Sant Kabir Mahotsav : संत कबीर की शिक्षाएं आज भी समाज को सही दिशा दिखाती हैं। उनके विचार हमें दूसरों का सम्मान करने, अपनी कमियों को पहचानने और समाज में आपसी भाईचारा बनाए रखने की प्रेरणा देते हैं। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में आयोजित संत कबीर महोत्सव के दौरान इन्हीं बातों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विचार अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन असहमति जताते समय भी भाषा में संयम और व्यवहार में गरिमा बनाए रखना जरूरी है।
संत कबीर महोत्सव में क्या बोले ओम बिरला ?
लखीमपुर खीरी के कबीरधाम आश्रम में संत कबीर महोत्सव और कबीर स्मृति भवन के शिलान्यास समारोह को संबोधित करते हुए ओम बिरला ने संत कबीर के विचारों को याद किया। उन्होंने कहा कि करुणा, समानता और सामाजिक समरसता का संदेश देने वाली उनकी शिक्षाएं सदियों बाद भी प्रासंगिक हैं। ओम बिरला के मुताबिक, इन विचारों को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने से समाज में संवेदनशीलता, आपसी समझ और सद्भाव को बढ़ावा मिल सकता है।
संत कबीर ने अपने समय में जातिगत भेदभाव, धार्मिक मतभेदों और सामाजिक रूढ़ियों को चुनौती दी थी। उन्होंने समाज को बांटने वाली दीवारों से ऊपर उठकर समानता और मानवता का संदेश दिया। ओम बिरला ने कहा कि संत कबीर ने जनसाधारण की भाषा में दोहों के जरिए सत्य, नैतिकता और सदाचार की बातें समझाईं। उनके विचार आज भी लोगों को भेदभाव से दूर रहकर एक-दूसरे का सम्मान करने की प्रेरणा देते हैं।
आत्मचिंतन से मिलती है बेहतर बनने की प्रेरणा
अपने संबोधन में लोकसभा अध्यक्ष ने संत कबीर के प्रसिद्ध दोहे का उल्लेख किया— “बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय; जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय।” इस दोहे के जरिए उन्होंने बताया कि दूसरों की गलतियां निकालने से पहले व्यक्ति को अपने व्यवहार और कमियों पर ध्यान देना चाहिए। आत्मचिंतन से विनम्रता बढ़ती है और दूसरों के प्रति करुणा का भाव विकसित होता है। ओम बिरला ने कहा कि किसी व्यक्ति को केवल उसके पद या प्रतिष्ठा से नहीं, बल्कि उसके काम और समाज के प्रति योगदान से पहचाना जाता है। संत कबीर का सादा जीवन और उनके विचारों का स्थायी प्रभाव इसका उदाहरण हैं। उन्होंने कहा कि निःस्वार्थ सेवा और दूसरों के कल्याण के लिए किए गए कार्य समाज पर गहरी छाप छोड़ते हैं।
कबीर स्मृति भवन नई पीढ़ी को देगा प्रेरणा
कबीर स्मृति भवन के शिलान्यास को महत्वपूर्ण बताते हुए ओम बिरला ने उम्मीद जताई कि यह संस्थान संत कबीर के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने में मदद करेगा। इससे नई पीढ़ी को उनके आध्यात्मिक ज्ञान, समानता और तर्कपूर्ण सोच को समझने का अवसर मिलेगा। इस दौरान उन्होंने संत असंग देव महाराज के योगदान की सराहना की। उन्होंने संत कबीर की शिक्षाओं के प्रचार-प्रसार और समाज सेवा के प्रति उनके समर्पण का भी उल्लेख किया। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, संत असंग देव महाराज, जनप्रतिनिधि, संतगण और बड़ी संख्या में संत कबीर के अनुयायी मौजूद रहे।
लखीमपुर खीरी में आयोजित संत कबीर महोत्सव में ओम बिरला ने समानता, आत्मचिंतन और सामाजिक सद्भाव का संदेश दिया। उन्होंने लोगों से संत कबीर की शिक्षाओं को जीवन में अपनाने और मतभेदों के बावजूद आपसी सम्मान बनाए रखने की अपील की।
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