RBI device lock rules: EMI मिस होने पर अब बैंक तुरंत नहीं लॉक कर सकेंगे फोन

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RBI device lock rules: अगर आपने कभी EMI पर मोबाइल, लैपटॉप या टैबलेट खरीदा है, तो आपके मन में भी यह डर जरूर रहता होगा कि एक भी किस्त मिस हुई तो बैंक कहीं तुरंत फोन लॉक न कर दे। डिजिटल लोन के इस दौर में रिकवरी के नाम पर होने वाली इस मनमानी पर अब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने सख्त कदम उठाया है। रिजर्व बैंक ने डिवाइस लॉक करने की पूरी प्रक्रिया को नए सिरे से तय करने का प्रस्ताव पेश किया है, जिससे ग्राहकों को बड़ी राहत मिलने जा रही है।

मोबाइल लोन EMI रिकवरी की प्रक्रिया में होंगे ये बड़े बदलाव

RBI के नए प्रस्ताव के मुताबिक, किस्त न चुकाने की स्थिति में कोई भी वित्तीय संस्थान या बैंक अपनी मर्जी से अचानक आपका फोन या लैपटॉप बंद नहीं कर सकेगा। अब तकनीकी पाबंदी केवल उसी डिवाइस पर लगाई जा सकेगी, जिसके लिए लोन लिया गया है। इसके अलावा, लोन एग्रीमेंट में डिवाइस लॉक करने से जुड़ी शर्त का स्पष्ट रूप से लिखा होना अनिवार्य होगा।

RBI ने बैंकों के लिए एक निश्चित समयसीमा और नोटिस की प्रक्रिया तय की है:

  • पहला नोटिस: लोन की ईएमआई 60 दिनों से अधिक बकाया होने पर बैंक को पहला औपचारिक नोटिस जारी करना होगा, जिसके बाद ग्राहक को भुगतान के लिए कम से कम 21 दिनों का समय मिलेगा।

  • दूसरा नोटिस: यदि इस अवधि में भी भुगतान नहीं होता है, तो बैंक दूसरा नोटिस भेजेगा और ग्राहक को 7 दिनों की अतिरिक्त मोहलत दी जाएगी।

  • 90 दिनों की सीमा: कुल मिलाकर 90 दिनों तक बकाया रहने और तय कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही डिवाइस पर पाबंदी लगाई जा सकेगी।

प्राइवेसी और जरूरी सुविधाओं का रखा जाएगा ध्यान

नए दिशा-निर्देशों में ग्राहकों के अधिकारों और प्राइवेसी का विशेष ध्यान रखा गया है। बैंक या रिकवरी एजेंसियां ग्राहक के फोन में मौजूद किसी भी निजी डेटा को एक्सेस या इस्तेमाल नहीं कर सकेंगी। इसके साथ ही, फोन को एक बार में पूरी तरह बंद करने के बजाय सुविधाओं को धीरे-धीरे सीमित किया जाएगा। हालांकि, इंटरनेट, इनकमिंग कॉल और जरूरी इमरजेंसी सेवाओं को किसी भी स्थिति में बंद करने की अनुमति नहीं होगी।

जैसे ही ग्राहक अपना बकाया भुगतान कर देगा, बैंक को एक घंटे के अंदर डिवाइस से सभी पाबंदियां हटानी होंगी। यदि बैंक इसमें देरी करता है, तो उसे ग्राहक को 250 रुपये प्रति घंटे के हिसाब से मुआवजा देना होगा। यह नया ढांचा 1 जनवरी 2027 से लागू करने की योजना है, जिससे डिजिटल वसूली के नाम पर होने वाले उत्पीड़न पर लगाम लगेगी।

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