पूर्व राष्ट्रपति Ram Nath Kovind की आत्मकथा के विमोचन पर भावुक हुए PM Modi, याद आई मां की ममता। DD News Uttar Pradesh

Ram Nath Kovind, PM Modi, DD News Uttar Pradesh, DD News UP

Share This Article

जीवन में सफलता चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न मिल जाए, मां का साया और उनका आशीर्वाद हर किसी के लिए सबसे अनमोल होता है। दिल्ली में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम (पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा ‘ट्रायम्फ ऑफ द इंडियन रिपब्लिक: माई लाइफ, माई स्ट्रगल्स’) के दौरान कुछ ऐसा ही भावुक मंजर देखने को मिला। अवसर था देश के पूर्व राष्ट्रपति Ram Nath Kovind की लिखी किताब के विमोचन का, जहां पीएम नरेंद्र मोदी ने पूर्व राष्ट्रपति के संघर्षों की सराहना करते हुए अपनी मां को भी याद किया और एक दिल को छू लेने वाली बात साझा की। 

जब पुरानी यादों को ताजा करते हुए भावुक हुए प्रधानमंत्री

कार्यक्रम के दौरान जब पूर्व राष्ट्रपति के जीवन की चर्चा छिड़ी, तो PM Modi खुद को रोक नहीं पाए। उन्होंने कहा कि वे खुद को बेहद भाग्यशाली मानते हैं कि उनकी मां ने सौ वर्ष से भी अधिक का जीवन जिया और हमेशा अपना आशीर्वाद उन्हें देती रहीं। इसके बावजूद, आज भी जब वे अपनी मां को याद करते हैं, तो मन में एक खालीपन सा महसूस होता है। पीएम मोदी ने कहा कि इंसान चाहे किसी भी मुकाम पर पहुंच जाए, मां का स्थान कोई और नहीं ले सकता और उनकी कमी इंसान को हमेशा महसूस होती रहती है।

बचपन का वह दर्दनाक हादसा जिसने जीवन को मजबूत बनाया

इस मौके पर पीएम मोदी ने पूर्व राष्ट्रपति के बचपन से जुड़े उस बेहद कठिन दौर का जिक्र किया, जब कानपुर देहात के एक छोटे से गांव में उनके घर में आग लग गई थी। उस हादसे में घर का सामान बचाते समय कोविंद जी की मां की मृत्यु हो गई थी। एक छोटे बच्चे के लिए अपनी आंखों के सामने मां को खो देना कितना पीड़ादायक रहा होगा, इसकी कल्पना करना भी आसान नहीं है। लेकिन उस हादसे के बाद भी वे टूटे नहीं, बल्कि पड़ोस की एक महिला और परिवार के सहयोग से खुद को मजबूत बनाकर आगे बढ़े और शिक्षा को ही अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया।

सादगी और विनम्रता से भरा एक प्रेरणादायक सफर

प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि रामनाथ कोविंद का जीवन इस बात का उदाहरण है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो इंसान हर मुश्किल को पार कर सकता है। संसाधनों की कमी के बावजूद उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी और अपनी मेहनत के दम पर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचे। राष्ट्रपति बनने के बाद भी उनकी सादगी और विनम्र स्वभाव में कोई बदलाव नहीं आया। पीएम मोदी ने बताया कि राष्ट्रपति भवन में मुलाकातों के दौरान भी कोविंद जी हमेशा प्रोटोकॉल से परे हटकर बेहद आत्मीयता से मिलते थे और गाड़ी के दरवाजे तक छोड़ने आते थे।

देश सेवा और समाज के प्रति समर्पण की एक मिसाल

अपने संबोधन में PM Modi ने कहा कि ज्यादातर लोग अपनी सफलता का श्रेय खुद लेते हैं और असफलताओं के लिए समाज को जिम्मेदार ठहराते हैं। लेकिन कोविंद जी ने अपने जीवन के संघर्षों से मिली जीत को हमेशा भारतीय गणतंत्र और लोकतंत्र की जीत माना। राष्ट्रपति पद से सेवामुक्त होने के बाद भी वे देश हित से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर लगातार काम कर रहे हैं। उनका यह पूरा जीवन सफर देश के युवाओं के लिए एक मार्गदर्शन की तरह है, जो सिखाता है कि परिस्थितियों से डरने के बजाय मेहनत और लगन से अपनी मंजिल हासिल की जा सकती है।

यह भी पढ़ें: पूर्व राष्ट्रपति Ram Nath Kovind की आत्मकथा के विमोचन पर बोले PM Modi

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted

Live Channel

Advertisement

[wonderplugin_slider id=1]

Live Poll

[democracy id="2"]

Also Read This