रायबरेली में ‘Digital Arrest’ का खौफ: रिटायर फौजी दंपति से 82.50 लाख की बड़ी ठगी

Digital Arrest

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Raebareli Digital Arrest: आजकल साइबर अपराधी ठगी के नए-नए तरीके अपना रहे हैं, और इनमें सबसे डरावना तरीका है 'Digital Arrest'। रायबरेली से एक ऐसा ही मामला सामने आया है जिसने सबको हैरान कर दिया है। यहां शहर के सम्राट नगर में रहने वाले एक रिटायर्ड फौजी सूर्यभान सिंह और उनकी पत्नी गायत्री सिंह को जालसाजों ने अपना शिकार बनाया। अपराधियों ने न केवल उन्हें डराया, बल्कि उनके जीवन की जमा-पूंजी के एक बड़े हिस्से पर भी हाथ साफ कर दिया।

रायबरेली डिजिटल अरेस्ट केस

यह घटना 11 अप्रैल को शुरू हुई जब जालसाजों ने सूर्यभान सिंह को किसी मामले में फंसाने की धमकी दी। अपराधियों ने वीडियो कॉल के जरिए उन पर इतना मानसिक दबाव बनाया कि दंपति अपने ही घर में कैद होकर रह गए। इसे ही ‘डिजिटल अरेस्ट’ कहा जाता है, जिसमें पीड़ित को डराकर उसे किसी से बात करने या मदद मांगने का मौका नहीं दिया जाता। पांच दिनों तक चले इस ड्रामे के दौरान दंपति पूरी तरह से ठगों के नियंत्रण में रहे।

साइबर ठगी और भारी वित्तीय नुकसान

दबाव में आकर पीड़ित ने अलग-अलग किस्तों में 82.50 लाख रुपये ठगों के बताए खातों में ट्रांसफर कर दिए। जांच में सामने आया कि 13 अप्रैल को नोएडा के एक बैंक खाते में 65 लाख रुपये भेजे गए, जबकि 15 और 16 अप्रैल को पश्चिम बंगाल के एक खाते में 17.50 लाख रुपये और ट्रांसफर किए गए। जब दंपति को अपनी गलती का एहसास हुआ, तब तक काफी देर हो चुकी थी। उन्होंने तुरंत पुलिस और साइबर पोर्टल पर इसकी शिकायत की।

Digital Arrest

पुलिस की कार्रवाई और रिकवरी

शिकायत मिलते ही रायबरेली पुलिस सक्रिय हुई। अपर पुलिस अधीक्षक आलोक सिंह ने बताया कि पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए ठगी गई रकम में से 32,25,750 रुपये को संबंधित बैंक खातों में ‘होल्ड’ करा दिया है। कोतवाली नगर में इस मामले की एफआईआर दर्ज कर ली गई है और जांच निरीक्षक जितेंद्र कुमार ओझा को सौंपी गई है। पुलिस अब उन खातों के मालिकों की तलाश कर रही है जिनके तार नोएडा और पश्चिम बंगाल से जुड़े हुए हैं।

यह घटना हम सभी के लिए एक बड़ी चेतावनी है। अगर कोई अनजान व्यक्ति कॉल करके पुलिस या जांच एजेंसी का डर दिखाए, तो घबराएं नहीं। याद रखें कि कोई भी सरकारी विभाग वीडियो कॉल के जरिए ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी कार्रवाई नहीं करता। ऐसे किसी भी कॉल पर अपनी निजी जानकारी या पैसा साझा न करें और तुरंत स्थानीय पुलिस या साइबर सेल को सूचित करें।

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