Prayagraj Sangam : गुरु पूर्णिमा 2026 का पावन पर्व पूरे देश में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। इस खास मौके पर उत्तर प्रदेश के प्रयागराज संगम में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। हजारों लोगों ने त्रिवेणी संगम में आस्था की डुबकी लगाई, अपने गुरु का आशीर्वाद लिया और दान-पुण्य कर इस पर्व को यादगार बनाया। अगर आप भी जानना चाहते हैं कि इस बार गुरु पूर्णिमा पर प्रयागराज में कैसा माहौल रहा और इस दिन का धार्मिक महत्व क्या है, तो आइए पूरी जानकारी आसान भाषा में जानते हैं।
आस्था का अनोखा नजारा
बुधवार तड़के से ही त्रिवेणी संगम के घाटों पर श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था। सूर्योदय से पहले ही संगम क्षेत्र में भक्तों की लंबी कतारें दिखाई देने लगीं। हर कोई पवित्र स्नान कर अपने जीवन में सुख-शांति और समृद्धि की कामना कर रहा था। स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने अपने-अपने गुरुओं की पूजा की, धार्मिक अनुष्ठान किए और जरूरतमंदों को दान भी दिया। पूरे घाट पर भक्ति और आस्था का ऐसा माहौल था, जिसने हर किसी को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
प्रयागराज संगम को हिंदू धर्म में सबसे पवित्र तीर्थों में गिना जाता है। यहां गंगा, यमुना और पौराणिक सरस्वती का संगम होता है। मान्यता है कि यहां स्नान करने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। गुरु पूर्णिमा के दिन इस स्थान का महत्व और भी बढ़ जाता है। इसलिए देश के अलग-अलग राज्यों से हजारों श्रद्धालु यहां पहुंचकर संगम स्नान करते हैं और गुरु का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
गुरु पूर्णिमा का महत्व
गुरु पूर्णिमा केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि गुरु के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का दिन भी है। सनातन परंपरा में गुरु को भगवान से भी ऊंचा स्थान दिया गया है क्योंकि वही जीवन का सही मार्ग दिखाते हैं। तीर्थ पुरोहित गोपाल गुरु ने बताया कि इस दिन श्रद्धालु भगवान वेदव्यास, भगवान श्रीकृष्ण, भगवान शिव और अपने गुरु की पूजा करते हैं। उन्होंने प्रसिद्ध दोहा भी सुनाया—
“गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागूं पाय।
बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय॥”
उनके अनुसार, गुरु पूर्णिमा पर दान-दक्षिणा, भोजन सेवा और धार्मिक कार्य करने से परिवार में सुख-शांति और समाज में सद्भाव बढ़ता है।
श्रद्धालुओं ने साझा किया अनुभव
संगम पहुंचे कई श्रद्धालुओं ने बताया कि वे सुबह जल्दी इसलिए पहुंचे ताकि भीड़ से पहले आराम से स्नान और पूजा कर सकें। एक श्रद्धालु ने कहा कि पवित्र डुबकी लगाने के बाद उन्होंने गुरु की पूजा की, दान किया और पूरे विश्व की खुशहाली की प्रार्थना की। ऐसे अवसर लोगों को अपनी आध्यात्मिक परंपराओं से जोड़ते हैं और मन में सकारात्मक सोच पैदा करते हैं। Guru Purnima 2026 का उत्साह सिर्फ प्रयागराज तक सीमित नहीं रहा। अयोध्या में श्रद्धालुओं ने सरयू नदी में स्नान कर मंदिरों में दर्शन किए। वहीं महाराष्ट्र के शिरडी स्थित साईं बाबा मंदिर में भी सुबह से भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी।देशभर के मंदिरों, आश्रमों और धार्मिक स्थलों पर गुरु-शिष्य परंपरा को याद करते हुए विशेष पूजा और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।
यह भी पढ़ें: IPS Transfer in UP 2026: लखनऊ और प्रयागराज को मिले नए पुलिस कमिश्नर, गृह सचिव और कई एडीजी ट्रांसफर







