Parliament Update: सरकार ने बताया- संकटग्रस्त समुद्री क्षेत्र से 3,972 भारतीय नाविक सुरक्षित लौटे | DD News Uttar Pradesh 

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Parliament Update : पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र में जब तनाव चरम पर था और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों की आवाजाही पर गंभीर खतरा मंडरा रहा था, तब भारत ने एक ऐतिहासिक और बड़ा ऑपरेशन चलाकर अपनी सप्लाई चेन को टूटने से बचा लिया। सरकार ने हाल ही में संसद में जानकारी दी है कि इस संकट के बावजूद भारत का सामान लेकर जा रहे 60 मालवाहक जहाज पूरी तरह सुरक्षित गुजरने में सफल रहे। इसके साथ ही संकटग्रस्त इलाके से 3,972 भारतीय नाविकों को भी सही-सलामत वतन वापस लाया गया है।

भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए क्यों खास है यह समुद्री रास्ता

फारस की खाड़ी और अरब सागर को जोड़ने वाला यह संकरा समुद्री मार्ग पूरी दुनिया के व्यापार के लिए रीढ़ की हड्डी माना जाता है। दुनिया के कुल कच्चे तेल के व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। भारत अपनी जरूरत का करीब 90 फीसदी कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है, जिसमें से एक बहुत बड़ा हिस्सा इराक, सऊदी अरब, यूएई और कुवैत जैसे खाड़ी देशों से आता है। अगर यह रास्ता बंद हो जाता, तो देश में पेट्रोल-डीजल के दाम तेजी से उछल सकते थे, लेकिन मुस्तैद नौसैनिक और कूटनीतिक नीति के चलते आपूर्ति में कोई रुकावट नहीं आई।

24 घंटे अलर्ट पर रहा कंट्रोल रूम, आए 52 हजार से ज्यादा कॉल और ईमेल

जहाजों और नाविकों की सुरक्षा के लिए सरकार ने बेहद सख्त आपातकालीन प्रोटोकॉल लागू किए थे। डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग कम्युनिकेशन सेंटर और एक विशेष कंट्रोल रूम 24 घंटे लगातार काम कर रहा था। जोखिम वाले इलाकों में मौजूद जहाजों को भारतीय नौसेना और मित्र देशों के युद्धपोतों से लगातार संपर्क में रहने के निर्देश दिए गए थे। इस पूरे अभियान के दौरान कंट्रोल रूम ने नाविकों और उनके परेशान परिजनों के 15,771 फोन कॉल अटेंड किए और 36,499 ईमेल के जवाब देकर स्थिति को मजबूती से संभाला।

3,972 भारतीय नाविकों की हुई सुरक्षित घर वापसी

अंतरराष्ट्रीय मर्चेंट नेवी में भारतीय नाविकों की एक बड़ी संख्या काम करती है। किसी भी युद्ध या क्षेत्रीय संघर्ष की स्थिति में कमर्शियल जहाजों पर तैनात इन नाविकों की जान पर सीधा खतरा बन आता है। खतरे की गंभीरता को समझते हुए भारत सरकार ने तुरंत कदम उठाए और विशेष प्रयासों के जरिए 3,972 भारतीय नाविकों को संकटग्रस्त इलाके से सुरक्षित निकाला। नाविकों के परिवारों को मानसिक संबल देने के लिए विशेष काउंसलर्स की मदद भी उपलब्ध कराई गई थी।

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