- 60% आवंटियों की सहमति के बाद ही टूटेंगी जर्जर इमारतें
- सर्वे और नई डिजाइन पर काम तेज
Lucknow में जर्जर और पुराने भवनों के पुनर्विकास की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) अब शहर के कई पुराने और बदहाल कॉम्प्लेक्स को तोड़कर उनकी जगह आधुनिक सुविधाओं से लैस नई इमारतें बनाएगा। यह पूरा काम उत्तर प्रदेश शहरी पुनर्विकास नीति 2026 के तहत किया जाएगा। इस नीति के अनुसार, किसी भी भवन को तोड़कर नया निर्माण करने से पहले वहां रहने वाले कम से कम 60 प्रतिशत आवंटियों की सहमति लेना अनिवार्य होगा। इसी उद्देश्य से एलडीए सबसे पहले संबंधित क्षेत्रों में सर्वे कराएगा, ताकि लोगों की राय और सहमति जुटाई जा सके। सर्वे के बाद ही नई इमारतों की डिजाइन और ड्राइंग को अंतिम रूप दिया जाएगा। एलडीए के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने इस योजना को लेकर आर्किटेक्ट्स के साथ विस्तृत बैठक भी की है। इस बैठक में यह तय किया गया कि शहर के किन-किन क्षेत्रों में किस तरह के आधुनिक कॉम्प्लेक्स विकसित किए जा सकते हैं। वजीर हसन रोड स्थित अपार्टमेंट की तर्ज पर अन्य पुराने भवनों को भी पुनर्विकसित करने की योजना बनाई जा रही है।

दरअसल, शहर में कई ऐसे कॉम्प्लेक्स और इमारतें हैं जो वर्षों पुरानी हो चुकी हैं और उनकी स्थिति काफी खराब है। इनमें से कई भवनों पर अवैध कब्जे भी हो गए हैं, जिससे उनका उपयोग और रखरखाव प्रभावित हो रहा है। एलडीए पिछले कई वर्षों से इन भवनों को खाली कराने और पुनर्विकास की योजना पर काम कर रहा था, लेकिन अब नई नीति लागू होने के बाद इस दिशा में तेजी आने की उम्मीद है।पुनर्विकास के तहत बनने वाली नई इमारतों में आधुनिक सुविधाएं, बेहतर पार्किंग, सुरक्षा व्यवस्था और सुव्यवस्थित ढांचा उपलब्ध कराया जाएगा। इससे न केवल शहर की सूरत बदलेगी, बल्कि लोगों को बेहतर आवासीय और व्यावसायिक सुविधाएं भी मिलेंगी। एलडीए अधिकारियों का मानना है कि इस योजना से लखनऊ के पुराने इलाकों को नया रूप मिलेगा और शहरी विकास को नई गति मिलेगी। साथ ही, यह कदम शहर को स्मार्ट और व्यवस्थित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।
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