- 51 जिलों में सशर्त अनुमति
- ATS की कमी से लाखों वाहन मालिकों को मिली राहत
Lucknow News: केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने वाहनों की फिटनेस जांच को लेकर अपने पुराने फैसले में बड़ा बदलाव किया है। पांच जनवरी को जारी आदेश, जिसमें मैनुअल फिटनेस जांच को पूरी तरह बंद कर दिया गया था, उसे अब महज चार महीने में ही वापस ले लिया गया है। नए आदेश के तहत अब उत्तर प्रदेश के 51 जिलों में सशर्त रूप से मैनुअल फिटनेस जांच दोबारा शुरू की जाएगी। दरअसल, राज्य के अधिकांश जिलों में ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (ATS) की सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण वाहन मालिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। करीब 18 लाख वाहनों को फिटनेस जांच के लिए 100 किलोमीटर तक की दूरी तय करनी पड़ रही थी। खासकर सीतापुर और रायबरेली जैसे जिलों के वाहन स्वामियों को लखनऊ आना पड़ रहा था, जिससे समय और धन दोनों की बर्बादी हो रही थी।

मंत्रालय के सचिव यतेंद्र कुमार द्वारा जारी नए निर्देशों के अनुसार, जिन जिलों में ATS का निर्माण कार्य जारी है, वहां एक निश्चित अवधि तक मैनुअल जांच की अनुमति दी गई है। हालांकि अलीगढ़ और प्रतापगढ़ जैसे जिलों में अब केवल ATS के जरिए ही फिटनेस जांच होगी। नई व्यवस्था के तहत गोरखपुर, अयोध्या, आजमगढ़, बुलंदशहर और हापुड़ में 30 जून तक मैनुअल जांच की सुविधा मिलेगी। वहीं प्रयागराज, मथुरा, गाजीपुर और रायबरेली को 30 सितंबर तक राहत दी गई है। इसके अलावा करीब 40 जिलों में 31 दिसंबर तक यह सुविधा जारी रहेगी। राज्य में ATS की स्थिति अभी भी सीमित है। फिलहाल बिजनौर, झांसी, कानपुर नगर, आगरा और वाराणसी समेत कुल 26 जिलों में ही ATS संचालित हैं। राजधानी Lucknow में बख्शी का तालाब के बाद बंथरा में दूसरा ATS केंद्र भी तैयार हो चुका है।
जुर्माने का प्रावधान
नियमों के अनुसार, नए व्यावसायिक वाहनों को पहले आठ वर्षों तक हर दो साल में और उसके बाद हर साल फिटनेस जांच करानी अनिवार्य है। फिटनेस न कराने पर पहली बार 5000 रुपये और दूसरी बार 10,000 रुपये तक का चालान किया जा सकता है।
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