UPI New Rules : भारत में रोजाना चाय की दुकान से लेकर बड़े मॉल तक, हम सब धड़ल्ले से UPI का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन मुफ्त में मिलने वाली इस सुविधा को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है। सरकार ने संसद में ‘पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट’ में बदलाव का एक प्रस्ताव रखा है। इस नए कानूनी प्रावधान से भविष्य में कुछ खास UPI ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट शुल्क यानी MDR (Merchant Discount Rate) लगाने का रास्ता साफ हो सकता है।
क्या आम जनता की जेब पर पड़ेगा असर?
इस खबर को सुनकर अगर आप चिंतित हो रहे हैं, तो राहत की बात यह है कि आम ग्राहकों को अपनी जेब से extra पैसे नहीं देने होंगे। विचार किए जा रहे प्रस्ताव के मुताबिक, यदि किसी व्यापारी का सालाना टर्नओवर 1.5 करोड़ रुपये से अधिक है, तो 2,000 रुपये से ज्यादा के UPI पेमेंट पर 0.3% से 0.5% तक का चार्ज लगाया जा सकता है। यानी आपके आसपास के छोटे दुकानदारों, सब्जी वालों और रिटेलर्स के लिए यह सेवा पूरी तरह से मुफ्त बनी रहेगी।
MDR चार्ज क्या है और इसे क्यों लाने की तैयारी है?
आसान शब्दों में कहें तो MDR वह फीस होती है जो व्यापारी डिजिटल पेमेंट प्रोसेस करने के लिए बैंकों और पेमेंट ऐप्स को देते हैं। क्रेडिट और डेबिट कार्ड पर व्यापारी पहले से ही यह चार्ज देते आ रहे हैं, लेकिन UPI पर सरकार ने इसे माफ किया हुआ था। अब पेमेंट कंपनियां और बैंक लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि बिल्कुल फ्री सर्विस देने से उनका बिजनेस मॉडल प्रभावित हो रहा है। अगर बड़े मर्चेंट्स से सीमित चार्ज लिया जाएगा, तो इससे डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को और मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।
2000 रुपये से बड़े ट्रांजैक्शन का गणित
वित्तीय विश्लेषकों (Jefferies) की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2,000 रुपये से ज्यादा के पेमेंट कुल UPI ट्रांजैक्शन की संख्या में भले ही सिर्फ 4 फीसदी हों, लेकिन कुल वैल्यू के मामले में इनकी हिस्सेदारी लगभग 67 प्रतिशत है। अगर सिर्फ इस बड़े सेगमेंट पर सीमित MDR लगाया जाता है, तो पेमेंट इंडस्ट्री को हर साल 5,000 से 10,000 करोड़ रुपये का राजस्व मिल सकता है, जिससे फिनटेक कंपनियों और बैंकों की क्षमता में बढ़ोतरी होगी।
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