BRICS Lucknow : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में ब्रिक्स सदस्य देशों के राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालयों (एनएसओ) के प्रमुखों की दो दिवसीय महत्वपूर्ण बैठक सफलतापूर्वक संपन्न हो गई है। इस कार्यक्रम में ब्रिक्स देशों के प्रतिनिधियों, नीति निर्माताओं, शिक्षाविदों और तकनीकी विशेषज्ञों सहित 350 से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया। इस पूरी बैठक का मुख्य उद्देश्य सांख्यिकीय ढांचों को आधुनिक तकनीकों से जोड़कर और मजबूत बनाना था।
डिजिटल सर्वेक्षण और ई-सिग्मा ऐप की सफलता
सत्र के दौरान आधुनिक सर्वेक्षण पद्धतियों और डिजिटल डेटा संग्रह पर काफी गहराई से चर्चा हुई। भारत ने इसमें अपने सफल अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि कैसे पेपर-आधारित पारंपरिक सर्वेक्षणों से निकलकर डिजिटल प्लेटफॉर्म की ओर कदम बढ़ाया गया है। इसमें भारत के ‘ई-सिग्मा’ ऐप की खास भूमिका रही, जो क्लाउड-आधारित और कंप्यूटर-असिस्टेड इंटरव्यू (CAPI) पर काम करता है। वहीं मिस्र ने अपने आधिकारिक आंकड़े तैयार करने में भू-स्थानिक तकनीक के फायदों के बारे में बताया।
वैश्विक आर्थिक डेटा और वैकल्पिक स्रोतों का एकीकरण
बैठक के दूसरे दौर में व्यापक आर्थिक और क्षेत्रीय आंकड़ों को मजबूत करने की रणनीतियों पर ध्यान केंद्रित किया गया। चीन ने 2025 एसएनए (SNA) ढांचे को लागू करने के अपने व्यावहारिक अनुभव साझा किए, तो दूसरी तरफ ब्राजील ने ई-कॉमर्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्मों से मिलने वाले वैकल्पिक डेटा को एकीकृत करने का मॉडल प्रस्तुत किया। इंडोनेशिया ने भी अपने आंकड़े पेश किए, जिससे सभी देशों को एक-दूसरे के तौर-तरीकों को समझने में मदद मिली।
एआई-रेडी पब्लिक डेटा सिस्टम पर गोलमेज चर्चा
मंत्रालय ने जनाग्रह सेंटर फॉर सिटीजनशिप एंड डेमोक्रेसी के सहयोग से एक विशेष सत्र आयोजित किया, जिसका विषय विकसित होते डेटा इकोसिस्टम में एआई-रेडी पब्लिक डेटा सिस्टम का निर्माण था। इस चर्चा में भारत, दक्षिण अफ्रीका, रूस, चीन और यूएई के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सभी देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि बिखरे हुए डेटा सिस्टम को सुरक्षित और उपयोगी एआई इकोसिस्टम में बदलने के लिए डेटा गवर्नेंस और मजबूत संस्थागत सहयोग बेहद जरूरी है।
भारत और इंडोनेशिया के बीच ऐतिहासिक समझौता
कार्यक्रम का एक बड़ा आकर्षण भारत सरकार के सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) और इंडोनेशिया के सांख्यिकी विभाग (BPS) के बीच हुआ समझौता रहा। दोनों देशों ने आधिकारिक सांख्यिकी, क्षमता निर्माण और रणनीतिक सहयोग को बढ़ाने के लिए आशय पत्र (LoI) पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता भविष्य में तकनीक, मानव संसाधन विकास और एआई जैसे उभरते क्षेत्रों में ज्ञान के आदान-प्रदान के लिए एक मजबूत ढांचा तैयार करेगा।







