Maithilisharan Gupt Jayanti : झांसी में राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की 140वीं जयंती पर भव्य सम्मान समारोह

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Maithilisharan Gupt Jayanti : राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की 140वीं जयंती के अवसर पर झांसी में भव्य सम्मान समारोह एवं अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। दीनदयाल सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में साहित्य, संस्कृति और राष्ट्रभक्ति के संदेश को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया गया। समारोह में विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिष्ठित हस्तियों ने राष्ट्रकवि के साहित्यिक योगदान और राष्ट्र निर्माण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को याद करते हुए युवाओं से उनके विचारों को अपनाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के क्षेत्रीय अध्यक्ष रामकिशोर साहू, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह क्षेत्र कार्यवाह अनिल श्रीवास्तव, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मुकेश पाण्डेय, गोसेवा आयोग के अध्यक्ष एवं राज्य मंत्री दर्जा प्राप्त श्याम बिहारी गुप्ता, भाजपा महानगर अध्यक्ष सुधीर सिंह तथा गहोई समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामगोपाल छिरोलिया सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

सभी वक्ताओं ने अपने संबोधन में राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की रचनाओं को भारतीय संस्कृति, राष्ट्रभक्ति और सामाजिक चेतना का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए उनके साहित्य को आज भी प्रासंगिक बताया।

डॉ. सचिदानन्द जोशी को मिला साहित्य सम्मान

समारोह के दौरान राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त शिक्षण संस्थान की ओर से प्रतिवर्ष प्रदान किया जाने वाला ‘राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त साहित्य सम्मान’ इस वर्ष डॉ. सचिदानन्द जोशी को प्रदान किया गया।

डॉ. जोशी वर्तमान में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के सदस्य सचिव, भारतीय विरासत संस्थान विश्वविद्यालय के कुलपति तथा कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय के संस्थापक कुलपति हैं। सम्मान प्राप्त करने के बाद उन्होंने राष्ट्रकवि के साहित्य को भारतीय समाज की अमूल्य धरोहर बताते हुए उनके विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया।

इस अवसर पर राष्ट्रकवि के पौत्र डॉ. वैभव गुप्ता ने भी परिवार की ओर से अपने विचार व्यक्त किए और कहा कि मैथिलीशरण गुप्त का साहित्य आज भी समाज को दिशा देने की क्षमता रखता है।

कवि सम्मेलन में गूंजा साहित्य और राष्ट्रभक्ति का स्वर

सम्मान समारोह के बाद आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा। देशभर से आए कवियों ने अपनी प्रभावशाली रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रसिद्ध कवयित्री अनामिका जैन ‘अंबर’, वीर रस के कवि अभिषेक पाठक तथा कवि एवं मंच संचालक अर्जुन सिंह ‘चाँद’ की प्रस्तुतियों को दर्शकों ने खूब सराहा और तालियों की गड़गड़ाहट से उनका उत्साहवर्धन किया।

अपने संबोधन में कवयित्री अनामिका जैन ‘अंबर’ ने कहा कि राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त का साहित्य युवाओं में राष्ट्रप्रेम और देशभक्ति की भावना को मजबूत करता है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे मोबाइल पर अधिक समय बिताने के बजाय पुस्तकों और पुस्तकालयों से जुड़ें तथा साहित्य के माध्यम से अपने व्यक्तित्व का विकास करें।

नई पीढ़ी तक पहुंचा राष्ट्रभक्ति और साहित्य का संदेश

राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की जयंती पर आयोजित यह समारोह केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि साहित्य, भारतीय संस्कृति और राष्ट्रभक्ति के मूल्यों को समाज तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम भी बना। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि महान साहित्यकारों के विचार आज भी समाज को नई दिशा देने और युवाओं में सकारात्मक सोच विकसित करने की क्षमता रखते हैं। साहित्य और संस्कृति से जुड़ाव ही राष्ट्र निर्माण की मजबूत नींव बन सकता है।

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