Lucknow : लखनऊ की सड़कों और सरकारी दफ्तरों के बाहर अतिक्रमण हटाना हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहा है। लेकिन इस बार मामला थोड़ा अलग और गंभीर है क्योंकि गाज वकीलों के चैंबरों पर गिरी है। ताजा अपडेट के अनुसार, लखनऊ जिला कोर्ट और कलेक्ट्रेट के आसपास बने अवैध चैंबरों पर नगर निगम ने लाल क्रॉस (Red Cross) लगा दिए हैं। कोर्ट परिसर में रातों-रात लगे इन निशानों और नोटिस ने अधिवक्ताओं के बीच खलबली मचा दी है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि अगर खुद से कब्जा नहीं हटाया गया, तो 17 मई को पीला पंजा यानी बुलडोजर अपना काम करेगा।
वकीलों के चैंबर और नोटिस का खेल
नगर निगम की टीम ने जिला कोर्ट के बाहर और भीतर करीब 72 ऐसे अतिक्रमण चिह्नित किए हैं, जो यातायात और आम जनता के लिए सिरदर्द बने हुए हैं। चैंबरों की दीवारों पर चस्पा किए गए नोटिस में 16 मई तक का अल्टीमेटम दिया गया है। वकीलों का आरोप है कि प्रशासन ने यह कार्रवाई रात के अंधेरे में की है, ताकि विरोध न हो सके। वहीं, कोर्ट परिसर के बाहर सालों से दुकान चला रहे दुकानदारों का कहना है कि उनकी पक्की दुकानें होने के बावजूद उन्हें हटाया जा रहा है, जबकि असली समस्या पार्किंग और बेतरतीब तरीके से बने चैंबरों की है।
हाईकोर्ट का सख्त रुख और जनहित
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच इस मामले में बेहद सख्त नजर आ रही है। न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति राजीव भारती की खंडपीठ ने स्पष्ट आदेश दिया है कि सार्वजनिक मार्गों पर किसी भी तरह के अवैध कब्जे को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने उस दुखद घटना का भी जिक्र किया जिसमें एंबुलेंस के ट्रैफिक में फंसने की वजह से एक मरीज की जान चली गई थी। कोर्ट ने कहा कि वकीलों के वैध चैंबरों की व्यवस्था अलग प्रक्रिया है, लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं कि सड़कों पर अवैध निर्माण की अनुमति दी जाए।
पुलिस बल और आगामी कार्रवाई की तैयारी
पिछली बार पुलिस बल की कमी के कारण यह अभियान अधूरा रह गया था, लेकिन इस बार प्रशासन कोई ढील देने के मूड में नहीं है। डीसीपी मुख्यालय और पश्चिम की ओर से पर्याप्त सुरक्षा बल मुहैया कराने का आश्वासन दिया गया है। राज्य सरकार के वकीलों ने कोर्ट को बताया कि 12 मई को नोटिस की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और अब 17 मई को अवैध कब्जों को ढहाने की निर्णायक कार्रवाई की जाएगी। नगर निगम ने यह भी चेतावनी दी है कि अतिक्रमण हटाने में जो भी खर्च आएगा, उसकी वसूली कब्जा करने वालों से ही की जाएगी।
शहर के इन इलाकों पर रहेगा असर
यह अभियान केवल जिला कोर्ट तक सीमित नहीं रहने वाला है। दायरे में पुराना हाईकोर्ट परिसर, कलेक्ट्रेट, राजस्व परिषद, बलरामपुर अस्पताल और कैसरबाग बस अड्डा जैसे महत्वपूर्ण इलाके भी शामिल हैं। इन क्षेत्रों में रहने वाले और रोजाना आने-जाने वाले हजारों लोग जाम की समस्या से बुरी तरह त्रस्त हैं। हाईकोर्ट ने अधिकारियों को आदेश दिया है कि कार्रवाई पूरी करने के बाद 15 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट कोर्ट में पेश की जाए, ताकि 25 मई की अगली सुनवाई में स्थिति साफ हो सके।