Lucknow News: लखनऊ में देश के पहले एनिमल बर्थ कंट्रोल ट्रेनिंग सेंटर का हुआ शुभारंभ, वेटनरी डॉक्टर्स और कर्मियों को मिलेगी ट्रेनिंग

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Lucknow News: बुधवार को राजधानी लखनऊ में आवारा कुत्तों की आबादी को नियंत्रित करने और इस दिशा में काम करने वाले कर्मियों को दक्ष बनाने के लिए एक बड़ी पहल की गई है। लखनऊ नगर निगम, एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच हुए एक त्रिपक्षीय समझौते के तहत, इंदिरा नगर के जरहरा क्षेत्र में देश के पहले ‘एनिमल बर्थ कंट्रोल ट्रेनिंग सेंटर’ (ABC centre) की स्थापना की गई है।

इस दौरान नगर विकास, ऊर्जा एवं अतिरिक्त मंत्री ए. के. शर्मा ने इस केंद्र का औपचारिक लोकार्पण किया, जिसकी अध्यक्षता शहर की महापौर सुषमा खर्कवाल ने की। इस विशेष केंद्र के शुरू होने से पशु चिकित्सकों, वेटनरी कर्मचारियों और कुत्तों को पकड़ने वाले कर्मचारियों को कुत्तों की नसबंदी, एंटी-रेबीज टीकाकरण, वैज्ञानिक तौर-तरीकों से पशु प्रबंधन और एनिमल वेलफेयर से जुड़ी आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक एवं सैद्धांतिक प्रशिक्षण प्राप्त हो सकेगा।

पशु चिकित्सा कर्मियों के लिए 15 दिन का विशेष प्रशिक्षण

इस केंद्र पर संचालित होने वाला ट्रेनिंग प्रोग्राम 15 दिनों का होगा, जिसमें पशु जन्म नियंत्रण के नियम, सर्जरी की मानक प्रक्रियाएं और जानवरों की देखभाल के तकनीकी पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी जाएगी। इस प्रशिक्षण के लिए श्रेणी के अनुसार शुल्क निर्धारित किया गया है, जिसके तहत पशु चिकित्सकों को 5 हजार रुपये, पैरा वेटनरी स्टाफ को 1.5 हजार रुपये और एनिमल हैंडलर्स को 1 हजार रुपये शुल्क देना होगा। कोर्स सफलतापूर्वक पूरा करने वाले सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र दिया जाएगा। जो भी इच्छुक उम्मीदवार इस ट्रेनिंग का हिस्सा बनना चाहते हैं, वे लखनऊ नगर निगम की आधिकारिक वेबसाइट lmc.up.nic.in से आवेदन फॉर्म मुफ्त में डाउनलोड कर सकते हैं।

कुत्तों की नसबंदी और माइक्रोचिपिंग की दिशा में नगर निगम की प्रगति

लखनऊ नगर निगम द्वारा आवारा कुत्तों की संख्या पर लगाम लगाने के लिए सितंबर 2019 से निरंतर विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इस मुहिम के तहत अब तक लगभग 1.08 लाख कुत्तों की नसबंदी की जा चुकी है। जनवरी 2026 में हुए सर्वे के मुताबिक, इस अभियान के जरिए शहर में कुत्तों की अनुमानित आबादी के करीब 80 प्रतिशत हिस्से को कवर किया जा चुका है। इसके साथ ही, कुत्तों की पहचान सुनिश्चित करने और उनका पूरा डिजिटल डेटाबेस तैयार करने के उद्देश्य से नगर निगम ने जून 2026 से उनकी माइक्रोचिपिंग का कार्य भी शुरू कर दिया है, जिससे उनके रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से सुरक्षित रखने में मदद मिल सकेगी।

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