London स्थित High Commission of India ने यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन (Birkbeck) में आयोजित एक गरिमापूर्ण कार्यक्रम के दौरान कुछ दर्शकों द्वारा किए गए “अमर्यादित और अभद्र व्यवहार” की कड़े शब्दों में की निंदा की है। दरअसल, यह पूरा विवाद 4 जून को आयोजित उस वक्त सामने आया जब भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत वहां “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अंतर्राष्ट्रीय कानून” (Artificial Intelligence and International Law) विषय पर एक विशेष व्याख्यान दे रहे थे। शुक्रवार को जारी एक आधिकारिक बयान में उच्चायोग ने कहा कि मुख्य न्यायाधीश के संबोधन के बाद एक “जीवंत चर्चा” चल रही थी, लेकिन उसी दौरान एक निश्चित व्यक्ति ने पूरे कार्यक्रम में व्यवधान डालने और उसे बाधित करने का प्रयास किया।
मतभेदों का प्रकटीकरण सभ्य तरीके से होना चाहिए, सार्वजनिक विमर्श के नियमों का हो पालन: भारतीय उच्चायोग
भारतीय उच्चायोग ने अपने आधिकारिक बयान में इस तरह के आचरण को पूरी तरह से खारिज करते हुए इसे बेहद निराशाजनक बताया है। बयान में साफ तौर पर कहा गया कि दर्शकों का ऐसा अभद्र व्यवहार पूरी तरह से अस्वीकार्य है और यह उस सम्मानजनक जुड़ाव व अनुशासन के बिल्कुल विपरीत है जो किसी भी सार्वजनिक विमर्श या चर्चा को संचालित करने के लिए आवश्यक होना चाहिए। उच्चायोग ने आगे यह भी रेखांकित किया कि एक लोकतांत्रिक समाज में वैचारिक मतभेद होना बेहद स्वाभाविक है और हर किसी को अपनी अलग राय रखने का अधिकार है, लेकिन इन मतभेदों को हमेशा एक ऐसे तरीके से व्यक्त किया जाना चाहिए जो पूरी तरह से सभ्य, मर्यादित और सम्मानजनक हो।
— India in the UK (@HCI_London) June 5, 2026
भारत में असहमति के अधिकार को लेकर हुआ था हंगामा
यह पूरा विवाद और भारतीय उच्चायोग का यह कड़ा बयान तब सामने आया है, जब इस कार्यक्रम से जुड़े कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित और वायरल होने लगे। इन वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि कार्यक्रम के प्रश्नकाल सत्र (Q&A Session) के दौरान दर्शकों में से कुछ सदस्यों ने अचानक भारत के भीतर असहमति और विरोध के अधिकार (Protection of Dissent) के संरक्षण को लेकर सवाल उठाने की कोशिश की थी। हालांकि, स्थिति को भांपते हुए कार्यक्रम के मॉडरेटर (संचालक) ने तुरंत बीच में हस्तक्षेप किया और उन सवालों को बीच में ही काट दिया। मॉडरेटर ने स्पष्ट रूप से दर्शकों को टोकते हुए कहा कि पूछे जा रहे ये सवाल मुख्य विषय यानी एआई और अंतर्राष्ट्रीय कानून से बिल्कुल भी संबंधित नहीं हैं, इसलिए इन्हें इस मंच पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।
