Lal Bahadur Shastri Jayanti: पूर्व प्रधानमंत्री ‘भारत रत्न’ लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर शुक्रवार को पूरे देश में उन्हें बड़े ही आदर और सम्मान के साथ याद किया गया। इस खास मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के जरिए शास्त्री जी को नमन किया और देश के प्रति उनके अतुलनीय योगदान को याद किया। पीएम मोदी ने कहा कि शास्त्री जी की सादगी, ईमानदारी और देश सेवा के प्रति उनका समर्पण आज भी हर भारतीय के लिए बेहद प्रेरणादायक है।
शास्त्री जी के प्रति देशवासियों में असीम श्रद्धा
PM Modi ने अपने संदेश में कहा कि लाल बहादुर शास्त्री का नाम आते ही हर देशवासी के मन में एक गहरा सम्मान उमड़ पड़ता है। शास्त्री जी का व्यक्तित्व बाहर से जितना सौम्य और विनम्र नजर आता था, अंदर से वह उतने ही मजबूत और दृढ़ निश्चयी नेता थे। अपने लगभग डेढ़ साल के छोटे से कार्यकाल में उन्होंने देश के जवानों और किसानों में नया आत्मविश्वास भरा और उन्हें आगे बढ़ने की राह दिखाई।
Homage to Lal Bahadur Shastri Ji, whose simplicity and dedication to the nation remain deeply inspiring. pic.twitter.com/edMiRdsf0v
— Narendra Modi (@narendramodi) October 2, 2026
स्वतंत्रता संग्राम में निभाई थी मजबूत भूमिका
लाल बहादुर शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर 1904 को उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में एक साधारण परिवार में हुआ था। छोटी उम्र में ही वह देश की आजादी की लड़ाई से जुड़ गए थे। साल 1921 में कांग्रेस में शामिल होने के बाद उन्होंने 1930 के नमक सत्याग्रह में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। आजादी के आंदोलन के दौरान उन्हें करीब 9 साल ब्रिटिश जेलों में भी बिताने पड़े, जहां उन्होंने देश-दुनिया के कई विचारकों की किताबें पढ़ीं और अपने विचारों को और भी परिपक्व बनाया।
‘जय जवान, जय किसान’ के नारे से दिया नया दिशा-निर्देश
1964 में जवाहरलाल नेहरू के निधन के बाद शास्त्री जी भारत के दूसरे प्रधानमंत्री बने। उनका 19 महीने का कार्यकाल चुनौतियों से भरा रहा। 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध और खाद्य संकट के कठिन समय में उन्होंने ‘जय जवान, जय किसान’ का ऐतिहासिक नारा दिया। इस नारे ने सीमाओं पर तैनात सैनिकों और खेतों में पसीना बहाते किसानों में ऐसा जोश भरा कि पूरा देश एक साथ खड़ा हो गया। उनकी यह सीख आज भी उतनी ही प्रासंगिक है।

