Kushinagar News : उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में नारायणी नदी ने एक बार फिर ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। जवहीं में तटबंध के पास कटान के बाद अब नदी ने अहिरौली दान में अपना रुख मोड़ लिया है। नदी की धारा तटबंध और आबादी की ओर बढ़ रही है। हालात को देखते हुए नदी किनारे रहने वाले ग्रामीणों को घर खाली कर सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया है।
कुशीनगर में नारायणी नदी ने बदली दिशा
एपी तटबंध के जवहीं क्षेत्र में कटान के बाद अब नारायणी यानी गंडक नदी अहिरौली दान में किमी 13.500 से किमी 14.000 के बीच दबाव बना रही है। नदी की धारा लगातार किनारे की ओर बढ़ रही है और कई घरों के बेहद करीब पहुंच चुकी है। जलस्तर में कमी आने के बाद भी नदी का दबाव कम नहीं हुआ है। बैकरोलिंग के कारण नदी किनारे की मिट्टी को काटते हुए पीछे की तरफ बढ़ रही है। इससे तटवर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है।
नदी की धारा घरों के नजदीक पहुंचने के बाद प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाए हैं। नदी किनारे रहने वाले ग्रामीणों से घर खाली कर सुरक्षित जगह जाने को कहा गया है। ग्रामीणों को अपने घर और खेतों की चिंता सता रही है। पिछले दिनों जवहीं में तटबंध टूटने के बाद नदी के बदले रुख ने अहिरौली दान के लोगों की परेशानी और बढ़ा दी है।
कटान रोकने के लिए तेज हुआ बचाव कार्य
हालात को देखते हुए बाढ़ खंड विभाग ने बचाव कार्य तेज कर दिया है। कटान प्रभावित हिस्से में बोल्डर डाले जा रहे हैं। इसके अलावा मिट्टी और मिट्टी से भरी बोरियों की मदद से नदी की धारा को रोकने की कोशिश की जा रही है। बाढ़ खंड के अधीक्षण अभियंता गोरखपुर केपी सिंह, एसडीओ दीपरतन सिंह और अन्य अभियंता मौके पर मौजूद हैं। अधिकारियों की निगरानी में बचाव सामग्री पहुंचाई जा रही है और कटान वाले हिस्सों को सुरक्षित करने का काम जारी है।
महदेवा में लोगों को मिली थोड़ी राहत
वहीं, खड्डा रेता क्षेत्र के महदेवा गांव में पिछले तीन दिनों से हो रही कटान रविवार को रुक गई। इससे ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। कुछ दिन पहले बैकरोलिंग के कारण नदी में एक मकान और तीन रिहायशी झोपड़ियां समा गई थीं। नदी का डिस्चार्ज कम होने के बाद फिलहाल कटान रुक गया है। इससे करीब एक दर्जन से ज्यादा झोपड़ियों पर मंडरा रहा तत्काल खतरा कुछ कम हुआ है। हालांकि नदी अभी भी गांव से करीब 50 मीटर की दूरी पर बह रही है, इसलिए ग्रामीण पूरी तरह निश्चिंत नहीं हैं।
गंडक नदी के जलस्तर पर भी नजर
वाल्मीकि गंडक बैराज से नदी का डिस्चार्ज करीब 80 हजार क्यूसेक के आसपास बताया जा रहा है। छितौनी तटबंध के भैसहा गेज पर नदी चेतावनी बिंदु 95 मीटर के मुकाबले 26 सेंटीमीटर नीचे बह रही है। इसके बावजूद विभाग नदी की धारा और कटान की दिशा पर लगातार नजर बनाए हुए है। अधिकारियों का फोकस फिलहाल कमजोर तटबंध और आबादी वाले हिस्सों को बचाने पर है।

