Jan Vishwas Bill: छोटे-मोटे 5 करोड़ मुकदमों से मिलेगी मुक्ति, बदल जाएगी न्याय की तस्वीर

Jan Vishwas Bill

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देश की न्याय व्यवस्था और व्यापारिक सुगमता (Ease of Doing Business) की दिशा में Jan Vishwas Bill एक क्रांतिकारी कदम साबित होने जा रहा है। संसद के दोनों सदनों से पारित इस बिल के लागू होने से न केवल आम जनजीवन आसान होगा, बल्कि अदालतों में वर्षों से लंबित पड़े लगभग पांच करोड़ छोटे-मोटे मुकदमों के निपटारे में भी बड़ी मदद मिलेगी। सरकार का लक्ष्य मामूली गलतियों के लिए जेल भेजने के प्रावधान को खत्म कर व्यवस्था को अधिक मानवीय और सरल बनाना है।

79 कानूनों के 1000 प्रावधानों में बदलाव

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार, Jan Vishwas Bill के तहत 79 विभिन्न कानूनों से जुड़े लगभग 1000 प्रावधानों को संशोधित किया गया है। अब तक कई ऐसी अति मामूली गलतियां थीं, जिन्हें अपराध की श्रेणी में रखा गया था। इस वजह से देश भर की अदालतों में करोड़ों मामले लंबित थे। नए बिल के तहत इन छोटी गलतियों को ‘अपराध’ (Criminal Offence) की श्रेणी से बाहर कर दिया गया है। अब ऐसी गलतियों के लिए जेल की सजा के बजाय सिर्फ आर्थिक जुर्माने या चेतावनी का प्रावधान होगा।

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फाइन और पेनाल्टी के बीच का अंतर

Jan Vishwas Bill की सबसे बड़ी विशेषता ‘फाइन’ को ‘पेनाल्टी’ में बदलना है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया कि ‘फाइन’ वसूलने के लिए कोर्ट केस करना पड़ता है और उसमें पुलिस की भूमिका होती है, जिससे मामला लंबा खिंचता है। वहीं, ‘पेनाल्टी’ लगाने का अधिकार संबंधित विभाग के पास होता है और इसके लिए पुलिस केस की जरूरत नहीं पड़ती। उदाहरण के तौर पर, नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) के कानूनों में बदलाव कर अवैध पानी के इस्तेमाल जैसे मामलों को अब पेनाल्टी के दायरे में लाया गया है।

राज्यों की भागीदारी और भविष्य की राह

केंद्र सरकार अब राज्यों से भी Jan Vishwas Bill के प्रावधानों को अपने यहाँ लागू करने का आग्रह कर रही है। अब तक देश के 12 राज्य इस बिल का अपना वर्जन ला चुके हैं। उद्योग विभाग के सचिव अमरदीप सिंह भाटिया के अनुसार, राज्यों से कहा गया है कि वे अपने स्थानीय निकाय (Local Bodies) के नियमों को सरल बनाएं। इससे न केवल अदालतों का बोझ कम होगा, बल्कि उद्यमियों और आम नागरिकों को ‘इंस्पेक्टर राज’ और गैर-जरूरी कानूनी अड़चनों से भी मुक्ति मिलेगी।

Jan Vishwas Bill न केवल न्यायपालिका के बोझ को कम करेगा, बल्कि विश्वास पर आधारित शासन (Trust-based Governance) को बढ़ावा देगा। छोटी गलतियों पर अपराधी बनाने के बजाय सुधार का अवसर देना ही इस बिल का मूल मंत्र है, जो भारत के विकास में एक मील का पत्थर साबित होगा।

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