Badrinath Mandir चढ़ावा चोरी मामले में SIT का बड़ा एक्शन, पूर्व मंदिर अधिकारी से करीब 4 घंटे तक पूछताछ

Badrinath Mandir

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Badrinath Mandir: उत्तराखंड के प्रसिद्ध धामों में से एक से जुड़ी एक बेहद गंभीर खबर सामने आई। भगवान बद्री विशाल के दरबार में आने वाले भक्तों के चढ़ावे में हेराफेरी के मामले को लेकर पुलिस और प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद हैं। इस पूरे प्रकरण की जांच के लिए गठित की गई विशेष जांच टीम (SIT) हर पहलू को गहराई से खंगाल रही है। हाल ही में इस मामले में कुछ नई कड़ियां जुड़ी हैं, जिनसे पता चलता है कि गड़बड़ी कहां और कैसे की जा रही थी। बद्रीनाथ चढ़ावा चोरी मामले में SIT का एक्शन जारी है, शुक्रवार को SIT ने बद्रीनाथ मंदिर के पूर्व अधिकारी Rajendra Singh Chauhan को गिरफ्तार किया है, राजेंद्र सिंह चौहान को 18 जुलाई को कोर्ट में पेश किया जाएगा।

Badrinath Mandir में एसआईटी (SIT) की जांच

बद्रीनाथ मंदिर में सामने आए इस चढ़ावा चोरी मामले में एसआईटी की जांच लगातार जारी है। बुधवार को जांच टीम ने जेपी कंपनी के एक कर्मचारी और एक पूर्व कर्मी को पूछताछ के लिए बुलाया गया था । सामने आया है कि जेपी कंपनी का यह कर्मचारी मूल रूप से हिमाचल का रहने वाला है और वहां अलकनंदा नदी के जलस्तर की निगरानी का काम करता था। लेकिन, वह मंदिर में ‘निःशुल्क सेवा’ के बहाने भी अक्सर मौजूद रहता था, जिससे उसकी गतिविधियों पर संदेह गहरा गया है।

धाम में भगवान के चढ़ावे में हेराफेरी के मामले की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। जैसे-जैसे जांच का दायरा बढ़ रहा है, मामले में नए खुलासे सामने आ रहे हैं। इसी कड़ी में SIT को एक और बड़ी सफलता मिली है। SIT ने शुक्रवार को बद्रीनाथ मंदिर के पूर्व अधिकारी राजेंद्र सिंह चौहान को दान में कथित गड़बड़ी के मामले में गिरफ्तार किया है। चार घंटे की पूछताछ के बाद हुई इस गिरफ्तारी के बाद उन्हें शनिवार, 18 जुलाई को कोर्ट में पेश किया जाएगा। पूछताछ के दौरान उनके बयानों में विरोधाभास पाया गया ।

जांच के दौरान मिले CCTV फुटेज के विश्लेषण से चौहान की पहचान एक मुख्य संदिग्ध के तौर पर की गई है ।  CCTV फुटेज में चौहान को 22, 25 और 29 जून को कैश के बंडल लेते और अपनी जेब में रखते देखा गया । Rajendra Singh Chauhan 30 जून, 2026 को मंदिर अधिकारी के पद से रिटायर हुए थे ।

BKTC तुरंत हरकत में

यह पूरा मामला तब खुलकर सामने आया जब सोशल मीडिया पर इसे लेकर चर्चाएं तेज हो गईं। इसके बाद BKTC (बद्री-केदार मंदिर समिति) ने तुरंत हरकत में आते हुए आंतरिक जांच के आदेश दिए थे। पता चला है कि संदिग्ध कर्मचारी चढ़ावे की गिनती और सिक्कों को अलग करने के काम में शामिल रहता था। इसी दौरान सोना-चांदी गायब करने का खेल चल रहा था। भैरव सेना के अध्यक्ष संदीप खत्री की शिकायत पर बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी ने मामले को गंभीरता से लिया।

भक्तों की आस्था

इस समय यह खबर उत्तराखंड की सबसे बड़ी चर्चाओं में शामिल है। भक्तों की आस्था से जुड़े इस मामले में स्थानीय लोगों और तीर्थयात्रियों में काफी नाराजगी है। एसआईटी अब इस बात का पता लगा रही है कि इस खेल में और कौन-कौन शामिल था। अधिकारियों का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज और पुराने रिकॉर्ड्स को खंगाला जा रहा है, और जो भी दोषी पाया जाएगा, उस पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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