Azamgarh cyber fraud: आजकल इंटरनेट (internet)के जमाने में जितनी सुविधाएं बढ़ी हैं, उतने ही धोखेधड़ी के मामले भी सामने आ रहे हैं। ऑनलाइन ट्रेडिंग (online trading) और डिजिटल अरेस्ट (digital arrest) के नाम पर लोगों को डराकर या लालच देकर ठगने वाले एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। पुलिस ने इस नेटवर्क से जुड़े तीन शातिर अपराधियों को दबोचने में सफलता हासिल की है। यह गिरोह देश के अलग-अलग राज्यों में एक्टिव था और मासूम लोगों को अपनी ठगी का शिकार बना रहा था। आइए जानते हैं पुलिस ने इस पूरे मामले का खुलासा कैसे किया।
Azamgarh cyber fraud में 3 आरोपी गिरफ्तार
इस पूरे मामले में साइबर क्राइम थाना की टीम ने बेहतरीन काम किया है। पुलिस ने मुखबिर और तकनीकी इनपुट के आधार पर आनंद राव, प्रशांत सिंह उर्फ लकी और सुनील नाम के तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इन आरोपियों के पास से पांच मोबाइल फोन, दो एटीएम कार्ड और कुछ नकदी बरामद हुई है। जांच में सामने आया कि ये आरोपी सीधे तौर पर लोगों से पैसे नहीं ठगते थे, बल्कि असली साइबर अपराधियों को मोटी कमीशन के बदले अपने बैंक खाते उपलब्ध करवाते थे, ताकि ठगी का पैसा आसानी से ट्रांसफर किया जा सके।
साइबर ठगी के तार जुड़े
इस गिरोह का जाल कितना बड़ा था, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस साइबर ठगी (Cyber Fraud) के तार देश के 20 राज्यों से जुड़े हुए हैं। करीब 15 दिन पहले प्रतिबिंब पोर्टल पर एक्सिस बैंक के एक संदिग्ध खाते की शिकायत मिली थी। जब पुलिस ने गहराई से जांच की, तो पता चला कि अकेले इसी एक खाते के खिलाफ पूरे देश में 73 शिकायतें दर्ज हैं। यह खाता ‘निहासा मैनपावर सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड’ नाम की एक फर्जी फर्म के नाम पर चल रहा था, जिसके जरिए अब तक करीब 84 करोड़ रुपये का अवैध लेनदेन किया जा चुका था।
इस बड़ी कामयाबी की चर्चा हर तरफ है और यह खबर बड़ी सुर्खियों में शामिल हो गई है। ग्रामीण इलाकों के अपर पुलिस अधीक्षक (एएसपी) चिराग जैन ने बताया कि पकड़े गए आरोपियों ने यह चालू खाता (करंट अकाउंट) अपने एक अन्य साथी मोनू सिंह को 4 लाख रुपये के फिक्स कमीशन पर दिलवाया था। इसके बाद जितनी भी ठगी की रकम इस खाते में आती थी, उस पर उन्हें 15 से 20 प्रतिशत का अलग से कमीशन मिलता था।
नवंबर 2025 में महज पांच दिनों के भीतर इस खाते में 4.85 करोड़ रुपये से अधिक का हेरफेर किया गया था। फिलहाल पुलिस की साइबर टीम यह पता लगा रही है कि इन लोगों ने अब तक ऐसे कितने फर्जी खाते अपराधियों को बेचे हैं।







