देश में पहली बार हुई है झरनों (Waterfalls) की गिनती । जल शक्ति मंत्रालय ने देश में झरनों की गणना के दूसरे भाग की रिपोर्ट जारी कर दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, देश के 10 राज्यों में कुल 14 हजार 468 झरनों की पहचान की गई है। वहीं, करीब 15% आबादी यानी लगभग 20 करोड़ लोग सीधे या परोक्ष रूप से झरनों के पानी पर निर्भर हैं। दरअसल, देश की पहली ‘स्प्रिंग सेंसस’ के दूसरे हिस्से की रिपोर्ट भारत मंडपम (Bharat Mandapam) में 9वें इंडिया इंटरनेशनल वाटर वीक 2026 के समापन समारोह में जारी की गई।
इस गणना में आंध्र प्रदेश, असम, गोवा, महाराष्ट्र, मणिपुर, ओडिशा, राजस्थान, तेलंगाना, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल को शामिल किया गया है। इस गणना का मकसद देशभर के झरनों का भरोसेमंद, एक जैसे मानकों वाला और जियो-रेफरेंस्ड डेटा तैयार करना है। ताकि झरना क्षेत्रों के बेहतर प्रबंधन, जल संरक्षण से जुड़ी योजनाओं और नीतियां तैयार करने में मदद मिल सके।
देश में पहली बार हुए झरना सर्वेक्षण के दूसरे भाग में 10 राज्यों के 14,468 झरनों की पहचान हुई, जिसमें मणिपुर और महाराष्ट्र सबसे आगे हैं। सर्वेक्षण में मणिपुर में 3,941, महाराष्ट्र में 3,652, ओडिशा में 1,957, पश्चिम बंगाल में 1,686, गोवा में 1,196, त्रिपुरा में 1,049, असम में 792, तेलंगाना में 148, आंध्र प्रदेश में 34 और राजस्थान में 13 झरनों की पहचान की गई।



