Insurance Scams: आज के डिजिटल युग में जहां रोजमर्रा के काम बेहद आसान हो गए हैं, वहीं दूसरी तरफ साइबर अपराध और वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में भी तेजी से बढ़ोतरी हुई है। इन दिनों जालसाज मासूम लोगों को अपना शिकार बनाने के लिए एक नया तरीका अपना रहे हैं। ठग लोगों को उनकी पुरानी बीमा पॉलिसी पर फंसे हुए पैसे दिलाने या भारी-भरकम मैच्योरिटी राशि का झांसा देकर लाखों रुपये की चपत लगा रहे हैं। अगर कोई अनजान व्यक्ति आपसे आपकी फंसी हुई बीमा राशि वापस दिलाने का दावा करता है, तो यह आपके लिए खतरे की घंटी है।
IRDAI ने दी बड़ी चेतावनी: अधिकारी नहीं करते सीधे कॉल
बीमा क्षेत्र के नियामक, भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने इस बढ़ते खतरे को देखते हुए नई गाइडलाइन जारी कर पॉलिसीधारकों को सतर्क किया है।
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सीधे कॉल नहीं: IRDAI ने साफ किया है कि कोई भी सरकारी अधिकारी या आईआरडीएआई का कर्मचारी किसी भी पॉलिसीधारक को सीधे कॉल नहीं करता है।
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दावों की हकीकत: यदि कोई व्यक्ति फोन पर दावा करता है कि वह नियामक संस्था से है और आपकी फंसी हुई राशि वापस दिला सकता है, तो बिना किसी संदेह के समझ लें कि वह किसी बड़े साइबर फ्रॉड का हिस्सा है।
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Insurance Scams से बचने के लिए गांठ बांध लें ये जरूरी बातें
वित्तीय नुकसान और साइबर हमलों से सुरक्षित रहने के लिए विशेषज्ञों और नियामक संस्थाओं ने कुछ बेहद महत्वपूर्ण सुरक्षा उपाय साझा किए हैं:
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वेरिफिकेशन है बेहद जरूरी: यदि कोई व्यक्ति खुद को आपकी बीमा कंपनी का अधिकारी बताकर फोन करता है, तो उसकी बातों में न आएं। बिना कोई व्यक्तिगत जानकारी साझा किए, तुरंत अपनी बीमा कंपनी के आधिकारिक कस्टमर केयर नंबर पर संपर्क करें या नजदीकी शाखा में जाकर खुद मामले की पड़ताल करें।
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अग्रिम भुगतान (Advance Payment) से बचें: आजकल जालसाज अक्सर टैक्स, प्रोसेसिंग फीस या सरकारी शुल्क के नाम पर एडवांस पैसों की मांग करते हैं। वे आपको किसी अज्ञात या व्यक्तिगत बैंक खाते में पैसे जमा करने की सलाह देते हैं। हमेशा याद रखें कि कोई भी वैध बीमा कंपनी कभी भी किसी अज्ञात खाते में पैसे भेजने के लिए नहीं कहती।
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दस्तावेजों की सुरक्षा का रखें विशेष ध्यान: अपने महत्वपूर्ण पहचान पत्रों और संवेदनशील दस्तावेजों की सुरक्षा आपके ही हाथों में है। अपने जरूरी सरकारी पहचान पत्र, पैन कार्ड या अन्य दस्तावेजों की फोटोकॉपी और डिजिटल क्रेडेंशियल्स किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ भूलकर भी साझा न करें। इसके साथ ही किसी भी असुरक्षित या संदिग्ध वेबसाइट पर अपने दस्तावेजों की जानकारी अपलोड करने से बचें।
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ओटीपी, पिन या पासवर्ड कभी न करें शेयर: अधिकांश लोग साइबर अपराधियों के जाल में इसलिए फंस जाते हैं क्योंकि वे जल्दबाजी या डर में आकर अपना पासवर्ड बता देते हैं। इस बात का हमेशा ध्यान रखें कि अपना वन-टाइम पासवर्ड (OTP), यूपीआई पिन (UPI PIN) या इंटरनेट बैंकिंग पासवर्ड किसी के साथ भी साझा नहीं करना है।
डिजिटल माध्यमों का उपयोग करते समय थोड़ी सी सावधानी और जागरूकता आपको किसी भी बड़े वित्तीय नुकसान और मानसिक तनाव से पूरी तरह सुरक्षित रख सकती है।
