Kanwar Mela 2026: कांवड़ यात्रा में पहली बार साइबर कमांडो की तैनाती

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Kanwar Mela 2026 को लेकर उत्तराखंड सरकार और पुलिस प्रशासन पूरी तरह तैयार है। हर साल लाखों शिवभक्त हरिद्वार से गंगाजल लेकर अपने-अपने शहरों की ओर रवाना होते हैं। इस बार श्रद्धालुओं की सुरक्षा और बेहतर व्यवस्था के लिए कई नए कदम उठाए गए हैं। सबसे खास बात यह है कि पहली बार साइबर कमांडो की तैनाती की जाएगी। ये टीम सोशल मीडिया पर 24 घंटे नजर रखेगी और फर्जी, भ्रामक या AI से बनाए गए वीडियो पर तुरंत कार्रवाई करेगी। इसके अलावा स्वास्थ्य, ट्रैफिक और यात्रा व्यवस्था को भी पहले से ज्यादा मजबूत किया गया है।

Kanwar Mela 2026 में पहली बार साइबर कमांडो की तैनाती

इस बार Kanwar Mela 2026 की सबसे बड़ी खासियत साइबर कमांडो हैं। प्रशासन के मुताबिक, सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों और फर्जी वीडियो पर लगातार निगरानी रखी जाएगी। अगर कोई सामान्य भ्रामक वीडियो वायरल होता है, तो उस पर 36 घंटे के भीतर कार्रवाई की जाएगी। वहीं, AI से तैयार किए गए फर्जी वीडियो की पहचान होने पर तीन घंटे के अंदर उन्हें हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। प्रशासन का मानना है कि सोशल मीडिया पर गलत जानकारी कई बार भीड़ और तनाव की वजह बन जाती है। इसलिए इस बार तकनीक का इस्तेमाल सुरक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा होगा। कांवड़ मेला सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। अधिकारियों को अलग-अलग सेक्टरों में जिम्मेदारी दी गई है ताकि कहीं भी कोई परेशानी होने पर तुरंत समाधान किया जा सके। प्रशासन ने बताया कि दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे को कांवड़ यात्रा से अलग रखा जाएगा। श्रद्धालु मेरठ-दिल्ली एक्सप्रेसवे मार्ग का उपयोग करेंगे, जिससे ट्रैफिक व्यवस्था बेहतर बनी रहे। अधिकारियों का कहना है कि उनका उद्देश्य यात्रा को सुरक्षित, शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराना है।

हरिद्वार कांवड़ मेला में इस बार जल्दी पहुंच रहे श्रद्धालु

इस बार हरिद्वार कांवड़ मेला में एक नया बदलाव देखने को मिल रहा है। पहले जहां अधिकतर श्रद्धालु यात्रा के अंतिम दिनों में हरिद्वार पहुंचते थे, वहीं अब बड़ी संख्या में लोग सावन शुरू होने से पहले ही गंगाजल लेने पहुंच रहे हैं। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह स्टील के बड़े कलशों का बढ़ता चलन है। अब कई श्रद्धालु 100 से 200 लीटर तक गंगाजल भरकर यात्रा कर रहे हैं। भारी वजन की वजह से यात्रा की रफ्तार धीमी हो जाती है और बीच-बीच में ज्यादा आराम करना पड़ता है। पहले जहां यात्रा पूरी करने में 8 से 10 दिन लगते थे, वहीं अब कई श्रद्धालुओं को 15 से 18 दिन तक का समय लग रहा है।

उत्तराखंड कांवड़ यात्रा में स्वास्थ्य सेवाओं के भी खास इंतजाम

उत्तराखंड कांवड़ यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए स्वास्थ्य विभाग ने भी पूरी तैयारी कर ली है। कांवड़ मेले में कुल 27 सरकारी स्वास्थ्य शिविर लगाए जाएंगे। इन शिविरों में 72 डॉक्टर, 68 फार्मासिस्ट और 120 अन्य स्वास्थ्यकर्मी तैनात रहेंगे। यानी करीब 260 कर्मचारी पूरे मेले के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं की जिम्मेदारी संभालेंगे। सोमवार से स्वास्थ्य विभाग ने कंट्रोल रूम के जरिए कर्मचारियों की ड्यूटी भी तय करनी शुरू कर दी है, ताकि जरूरत पड़ने पर श्रद्धालुओं को तुरंत इलाज मिल सके।

बदल रही है कांवड़ यात्रा की तस्वीर

पिछले कुछ वर्षों में कांवड़ यात्रा का स्वरूप काफी बदला है। पहले श्रद्धालु हल्के कलश में गंगाजल लेकर पैदल यात्रा करते थे, लेकिन अब बड़े और आकर्षक स्टील के कलशों का चलन तेजी से बढ़ा है। इसी वजह से यात्रा की अवधि भी बढ़ गई है। रास्ते में विश्राम स्थलों, चिकित्सा सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत पहले से ज्यादा महसूस की जा रही है। प्रशासन भी इन्हीं बदलावों को ध्यान में रखते हुए इस बार नई रणनीति के साथ तैयारियों में जुटा है।

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