Muzaffarnagar Double Murder case: मां-बेटे की बेरहमी से हत्या करने वाले दोषी को अदालत ने सुनाई फांसी की सजा

Muzaffarnagar

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उत्तर प्रदेश के Muzaffarnagar से न्याय की एक बड़ी खबर सामने आई है। जिला न्यायालय ने 15 साल पुराने एक बेहद संवेदनशील और गंभीर मामले में अपना फैसला सुनाते हुए आरोपी को फांसी की सजा दी है। यह मामला एक महिला और उसके मासूम बेटे की बेरहमी से की गई हत्या से जुड़ा है। अदालत ने न सिर्फ दोषी को मौत की सजा सुनाई, बल्कि उस पर 5 लाख रुपये का भारी आर्थिक जुर्माना भी लगाया है। सालों पुराने इस मामले में आए कोर्ट के फैसले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि कानून के घर में देर है अंधेर नहीं।

Muzaffarnagar, हत्या

कैसे शुरू हुई थी यह दुखद घटना?

यह पूरी घटना नवंबर 2011 की है। चरथावल थाना क्षेत्र के सलेमपुर गांव में रहने वाले सुरेश चंद की 30 वर्षीय पत्नी राजेश देवी अपने 6 साल के बेटे हिमांशु के साथ घर से रुड़की जाने के लिए निकली थीं। वह अपनी बेटी के घर जा रही थीं, लेकिन रास्ते से ही वह अचानक लापता हो गईं। परिजनों ने काफी तलाश की पर कुछ पता नहीं चला। इसके बाद 13 नवंबर 2011 को जंगल में मां-बेटी के क्षत-विक्षत शव बरामद हुए। शवों की हालत देखकर इलाके में सनसनी फैल गई थी। पुलिस ने तुरंत शवों को कब्जे में लेकर जांच शुरू की।

पुलिस जांच में सामने आई हत्या की खौफनाक वजह

जब पुलिस ने इस दोहरे हत्याकांड की कड़ियां जोड़ना शुरू किया, तो कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं। जांच में पता चला कि राजेश देवी के बरेली निवासी रईस उर्फ जहूर हसन के साथ संबंध थे। राजेश देवी रईस के यहां मजदूरी का काम भी करती थी। वह रईस पर लगातार साथ रहने और शादी करने का दबाव बना रही थी। इसी बात से परेशान होकर रईस ने उसे रास्ते से हटाने की साजिश रची। वह दोनों को बहला-फुसलाकर जंगल में प्रहलाद के खेत में ले गया और वहां ईंट से पीट-पीटकर महिला की हत्या कर दी। मां को तड़पता देख जब मासूम बच्चा रोने लगा, तो रईस ने उसे भी नहीं छोड़ा और उसकी भी जान ले ली।

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Muzaffarnagar, हत्या

अदालत ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला

पुलिस ने घटना के बाद आरोपी रईस को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। सरकारी अधिवक्ता कुलदीप कुमार के मुताबिक, शनिवार को अपर सत्र न्यायालय कोर्ट संख्या 3 ने इस मामले की गंभीरता और क्रूरता को देखते हुए अभियुक्त रईस को फांसी की सजा सुनाई। कोर्ट रूम में फैसला सुनते ही सुरक्षा बढ़ा दी गई और आरोपी को दोबारा जेल भेज दिया गया।

15 साल बाद ही सही, लेकिन इस जघन्य अपराध के दोषी को उसके कर्मों की सजा मिल गई है। Muzaffarnagar कोर्ट का यह फैसला समाज में एक कड़ा संदेश देता है कि अपराध चाहे कितना भी पुराना क्यों न हो जाए, अपराधी कानून की नजरों से बच नहीं सकता। मासूम बच्चे और मां को आखिरकार न्याय मिल गया है।

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