India UAE Relations : भारत की विदेश नीति के लिहाज से 19 और 20 अक्टूबर का दिन अहम रहने वाला है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर मुंबई में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और अमेरिका के विदेश मंत्रियों के साथ बैठक करेंगे। इन मुलाकातों में व्यापार, निवेश, ऊर्जा, रक्षा और क्षेत्रीय हालात जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। इन बैठकों पर इसलिए भी नजर रहेगी, क्योंकि भारत के दोनों देशों के साथ मजबूत रणनीतिक और आर्थिक संबंध हैं।
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, एस. जयशंकर 19 और 20 अक्टूबर को UAE के उपप्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान की मेजबानी करेंगे। इस बैठक में भारत और UAE के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा की जाएगी। दोनों पक्ष ऊर्जा, व्यापार, निवेश, वित्तीय प्रौद्योगिकी, रक्षा और संपर्क के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा करेंगे। इसके अलावा पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति और वैश्विक मुद्दे भी बातचीत का हिस्सा होंगे। जयशंकर हाल ही में 14 से 16 अक्टूबर तक UAE के दौरे पर गए थे। ऐसे में मुंबई में होने वाली यह मुलाकात दोनों देशों के बीच जारी बातचीत को आगे बढ़ाने का अवसर होगी।
मार्को रूबियो से मिलेंगे एस. जयशंकर
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो 19 से 22 अक्टूबर तक भारत की यात्रा पर रहेंगे। इस दौरान 20 अक्टूबर को मुंबई में उनकी मुलाकात एस. जयशंकर से होगी।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों मंत्री भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा करेंगे। बातचीत में ऊर्जा, व्यापार, निवेश और रक्षा सहयोग के साथ महत्वपूर्ण एवं उभरती तकनीकों पर भी ध्यान दिया जाएगा। इसके अलावा क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर विचारों का आदान-प्रदान होने की उम्मीद है। भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाना इस बैठक का अहम हिस्सा रहेगा।
जामनगर भी जाएंगे अमेरिकी विदेश मंत्री
मार्को रूबियो अपनी भारत यात्रा के दौरान मुंबई के अलावा गुजरात के जामनगर भी जाएंगे। उनकी यात्रा को भारत-अमेरिका संबंधों में सहयोग के नए अवसर तलाशने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के मुताबिक, जयशंकर मुंबई में अमेरिका की स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ के समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगे। UAE भारत का एक महत्वपूर्ण आर्थिक और रणनीतिक साझेदार है, जबकि अमेरिका के साथ रक्षा, तकनीक, व्यापार और निवेश जैसे क्षेत्रों में सहयोग लगातार अहम बना हुआ है। एक ही शहर में दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के साथ होने वाली बातचीत भारत को अपनी प्राथमिकताओं पर चर्चा करने का अवसर देगी। हालांकि, बैठकों में किन मुद्दों पर सहमति बनती है और क्या नए फैसले सामने आते हैं, यह बातचीत के बाद ही स्पष्ट होगा।