114 Rafale Fighter Jet Deal: ₹3.60 लाख करोड़ के रक्षा सौदे को हरी झंडी, जानें पूरी डिटेल्स

Rafale Fighter

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Rafale Fighter Jet Deal: भारत सरकार ने 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद समेत लगभग 3.60 लाख करोड़ रुपये के विशाल रक्षा सौदे को मंजूरी दे दी है। इस ऐतिहासिक फैसले को अब तक की सबसे बड़ी रक्षा खरीदों में गिना जा रहा है। रक्षा मंत्री Rajnath Singh की अध्यक्षता में हुई रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) की बैठक में सशस्त्र बलों की युद्धक क्षमता को सशक्त बनाने के लिए इस पूंजीगत खरीद को स्वीकृति दी गई। ये फैसला सिर्फ एक खरीद नहीं बल्कि आने वाले वर्षों के लिए भारत की सैन्य रणनीति की मजबूत बुनियाद माना जा रहा है, इस फैसले से वायुसेना से लेकर थलसेना, नौसेना और तटरक्षक बल तक सभी को बड़ी ताकत मिलने जा रही है।  इस पैकेज के जरिए भारत की मारक क्षमता, निगरानी तंत्र और ऑपरेशनल तैयारियों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी। वहीं, इस फैसले की जानकारी खुद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर दी। अपने ट्वीट में उन्होंने कहा कि रक्षा बलों की युद्ध क्षमता बढ़ाने के लिए 3.60 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत अधिग्रहण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है…..

इस परियोजना के तहत राफेल बनाने वाली कंपनी Dassault Aviation 18 विमान सीधे उड़ान भरने की स्थिति में भारत को सौंपेगी, जबकि शेष 96 विमानों का निर्माण देश में ही किया जाएगा। इस निर्माण प्रक्रिया में 50 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी और उत्पादन चरणबद्ध तरीके से पूरा होगा।

हालांकि रक्षा मंत्रालय ने आधिकारिक लागत सार्वजनिक नहीं की है, लेकिन अनुमान है कि इस सौदे की कीमत 2.90 लाख करोड़ से 3.15 लाख करोड़ रुपये के बीच हो सकती है। यह मंजूरी फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron की भारत यात्रा से ठीक पहले दी गई है। हालांकि अंतिम अनुबंध पर हस्ताक्षर वर्ष के अंत तक होने की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि अभी हथियार पैकेज और अन्य तकनीकी पहलुओं पर विस्तृत बातचीत बाकी है।

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इस रक्षा कार्यक्रम को अंतिम स्वीकृति प्रधानमंत्री Narendra Modi की अध्यक्षता वाली सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (CCS) से भी लेनी होगी। वर्ष 2019 में भारतीय वायुसेना ने 114 बहु-उद्देश्यीय लड़ाकू विमान (MRFA) के लिए प्रारंभिक निविदा जारी की थी। इस वैश्विक प्रतिस्पर्धा में Lockheed Martin का F-21, Boeing का F/A-18 और Eurofighter GmbH का यूरोफाइटर टाइफून भी दावेदार थे।

भारतीय वायुसेना की स्क्वाड्रन संख्या वर्तमान में स्वीकृत 42 के मुकाबले घटकर 31 रह गई है, जिससे नई खरीद की आवश्यकता और अधिक महत्वपूर्ण हो गई थी। इससे पहले 2015 में सरकार ने 36 राफेल विमानों की खरीद का निर्णय लिया था, जिनका संचालन वायुसेना पहले से कर रही है।

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इस सौदे के तहत खरीदी जाने वाली अधिकांश उन्नत मिसाइलों का निर्माण भारत में ही किया जाएगा। इससे लंबी दूरी तक सटीक हमले करने की क्षमता बढ़ेगी और वायुसेना की निवारक शक्ति मजबूत होगी। मंत्रालय के अनुसार, यह अधिग्रहण हर परिस्थिति में हवाई वर्चस्व स्थापित करने में मदद करेगा।

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इसके अतिरिक्त DAC ने अन्य महत्वपूर्ण प्रस्तावों को भी मंजूरी दी है। भारतीय नौसेना के लिए चार मेगावाट क्षमता वाले समुद्री गैस टरबाइन आधारित विद्युत जनरेटर की खरीद को ‘मेक-I’ श्रेणी में शामिल किया गया है, जिससे विदेशी निर्भरता कम होगी। साथ ही, नौसेना के लिए P8I लंबी दूरी के समुद्री टोही विमान की खरीद से पनडुब्बी रोधी युद्ध, समुद्री निगरानी और हमलावर क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

इस फैसले के साथ ही भारत ने साफ संकेत दे दिया है कि बदलते वैश्विक सुरक्षा माहौल में सैन्य आधुनिकीकरण अब सर्वोच्च प्राथमिकता है जहां एक ओर वायुसेना को नई पीढ़ी के मल्टी रोल फाइटर एयरक्राफ्ट मिलेंगे, वहीं थलसेना और नौसेना की ऑपरेशनल क्षमता भी नई ऊंचाई पर पहुंचेगी साथ ही ‘मेक-1’ श्रेणी के तहत स्वदेशी निर्माण को बढ़ावा देकर सरकार आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है। कुल मिलाकर 3.60 लाख करोड़ का ये रक्षा पैकेज सिर्फ एक आर्थिक फैसला नहीं बल्कि भारत की सामरिक शक्ति, तकनीकी आत्मनिर्भरता और भविष्य की सुरक्षा रणनीति का मजबूत रोडमैप है अब निगाहें आगे की प्रक्रियाओं और डील फाइनल होने पर टिकी हैं लेकिन इतना तय है आने वाले समय में भारतीय सेनाओं की ताकत पहले से कहीं ज्यादा प्रभावशाली नजर आएगी।

यह भी पढ़ें: Vande Mataram पर केंद्र सरकार की नई गाइडलाइन: सरकारी कार्यक्रमों और स्कूलों में अनिवार्य गायन

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