IMA की 157वीं पासिंग आउट परेडजनरल उपेंद्र द्विवेदी ने 12 सेकंड में लगाए 18 Pushups

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देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) में शनिवार को 157वीं पासिंग आउट परेड का भव्य आयोजन हुआ, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में परिजन, सैन्य अधिकारी और विशिष्ट अतिथि मौजूद थे। इस परेड में भारतीय सेना में कमीशन प्राप्त करने वाले युवा अधिकारियों ने अपने कठिन प्रशिक्षण के बाद सैन्य सेवा की शुरुआत की।

परेड की समीक्षा का गौरव थल सेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी को प्राप्त हुआ। जनरल द्विवेदी ने परेड के बाद नव-नियुक्त अधिकारियों को बधाई देते हुए कहा कि भारतीय सेना में कमीशन मिलना केवल एक प्रशिक्षण का समापन नहीं होता, बल्कि यह राष्ट्र के प्रति आजीवन दायित्व और निस्वार्थ सेवा की शुरुआत है। उनके इस बयान में यह स्पष्ट होता है कि सेना में शामिल होने का मतलब सिर्फ एक पेशेवर करियर नहीं, बल्कि यह राष्ट्र सेवा का एक पवित्र कर्तव्य है जिसे हर अधिकारी को निभाना होता है।

यह परेड केवल सैन्य अनुशासन का प्रदर्शन नहीं थी, बल्कि एक उत्सव भी थी जो युवा अधिकारियों की समर्पण, साहस, नेतृत्व और मानसिक दृढ़ता को मनाने का अवसर प्रदान करती है। इसके साथ ही यह भारतीय सेना के आदर्श वाक्य “वीरता और विवेक” का प्रतीक भी रही।

इसी दौरान एक विशेष घटना ने इस परेड को और भी यादगार बना दिया। जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने नए अधिकारियों के साथ मिलकर पुशअप्स लगाए, और यह दृश्य भारतीय सेना में नेतृत्व का उदाहरण प्रस्तुत करने का प्रतीक बन गया। इस दौरान जनरल द्विवेदी ने मात्र 12 सेकेंड में 18 पुशअप्स लगाए, जिसे देखकर उपस्थित सभी लोग प्रभावित हुए। यह न केवल एक उत्सव का हिस्सा था, बल्कि यह सैन्य नेतृत्व का स्पष्ट संदेश था कि रैंक से पहले सैनिक भावना और कंधे से कंधा मिलाकर साथ चलने की भावना सबसे महत्वपूर्ण होती है।

जैसा कि हम जानते हैं, सेना में नेतृत्व केवल एक पद या रैंक का नाम नहीं होता, बल्कि यह जवानों के बीच विश्वास, समर्पण और साझा कर्तव्य की भावना से जुड़ा होता है। जनरल द्विवेदी का यह कदम यह सिद्ध करता है कि एक सशस्त्र बल का नेतृत्व हमेशा अपने जवानों के साथ खड़ा रहता है, और यह उनकी प्रतिबद्धता और प्रेरणा का हिस्सा है। यह दृश्य उस सोच और भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक है जो सैनिक और उनके अधिकारियों के बीच होता है।

यह समारोह केवल सैन्य अधिकारियों के लिए नहीं, बल्कि उनके परिजनों के लिए भी एक भावुक और गर्व से भरा पल था। नव-नियुक्त अधिकारियों के माता-पिता और परिवारजन भी इस पल के साक्षी बने, जब उनके बच्चों ने भारतीय सेना का हिस्सा बनने का सपना साकार किया। इस परेड में दिखाए गए अनुशासन, मेहनत और संघर्ष ने परिवारों को गर्व महसूस कराया और यह उनकी अपार खुशी का क्षण था।

सैन्य अकादमी का यह आयोजन हर नव-नियुक्त अधिकारी के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जो न केवल उनके सैन्य करियर की शुरुआत करता है, बल्कि उन्हें भारतीय सेना की परंपराओं और मूल्यों के साथ एक नई जिम्मेदारी भी सौंपता है।

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