Gaya Pitru Paksha : बिहार के गया में चल रहे 15 दिवसीय पितृपक्ष मेले में देश-विदेश से श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी है। कोई अपने माता-पिता के लिए पिंडदान करने पहुंचा है, तो कोई अपने पति, भाई या परिवार के दूसरे सदस्यों के मोक्ष की कामना लेकर गया आया है। गया पितृपक्ष मेला में विष्णुपद मंदिर और फल्गु नदी के तट के आसपास श्रद्धालु पिंडदान, श्राद्ध कर्म और तर्पण कर रहे हैं। सोमवार को यहां एक दिन में 3 लाख 95 हजार तीर्थ यात्रियों के पहुंचने का रिकॉर्ड दर्ज किया गया।
गया में पिंडदान के लिए उमड़ी भीड़
पितृपक्ष के दौरान गया में पिंडदान और श्राद्ध कर्म का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इसी आस्था के चलते देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग यहां पहुंच रहे हैं। कोई बेटा अपने माता-पिता के लिए कर्मकांड कर रहा है, तो कोई बेटी अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना लेकर आई है। महाराष्ट्र से पहुंचे सेवक राम ने बताया कि वह अपने माता-पिता, भाई-भाभी और उनके बच्चों के लिए गया में पिंडदान करने आए हैं।
विष्णुपद मंदिर और फल्गु नदी के पास हो रहा अनुष्ठान
गया के विष्णुपद मंदिर क्षेत्र और फल्गु नदी के किनारे बड़ी संख्या में श्रद्धालु धार्मिक अनुष्ठान कर रहे हैं। धार्मिक मान्यता है कि यहां पिंडदान और तर्पण करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है और वंशजों को पितृ ऋण से मुक्ति मिलती है। विष्णुपद मंदिर को लेकर भी खास धार्मिक मान्यता है। माना जाता है कि यहां भगवान विष्णु के चरणों के निशान मौजूद हैं।
गयासुर से जुड़ी है पिंडदान की कथा
श्रद्धालुओं के बीच गया में पिंडदान से जुड़ी गयासुर की कथा भी प्रचलित है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, गयासुर नाम का एक असुर था। देवताओं ने उसके ऊपर यज्ञ किया और बाद में भगवान विष्णु ने अपना चरण उसके ऊपर रखा। मान्यता है कि गयासुर ने वरदान मांगा कि जो व्यक्ति गया आकर अपने पितरों का पिंडदान करे, उसके पितरों को मोक्ष प्राप्त हो। इसी धार्मिक विश्वास के साथ आज भी बड़ी संख्या में लोग गया पहुंचते हैं।
माता सीता से जुड़ी कथा भी है प्रचलित
श्रद्धालु गया के पिंडदान को भगवान श्रीराम और माता सीता से जुड़ी एक कथा से भी जोड़ते हैं। मान्यता है कि भगवान श्रीराम राजा दशरथ का पिंडदान करने के लिए गया आए थे। कथा के अनुसार, जब श्रीराम पूजा की सामग्री लेने गए, तब माता सीता ने बालू से पिंड बनाकर राजा दशरथ को अर्पित किया। हालांकि, यह धार्मिक परंपरा और आस्था से जुड़ी कथा है।
एक दिन में 3.95 लाख श्रद्धालु पहुंचे
गया के जिलाधिकारी शशांक शुभंकर के मुताबिक, सोमवार को मेले में तीर्थ यात्रियों की काफी भीड़ रही। एक दिन में 3 लाख 95 हजार श्रद्धालुओं के पहुंचने का आंकड़ा दर्ज किया गया।
जिलाधिकारी के अनुसार, सोमवार को 9,768 तीर्थ यात्रियों ने मेडिकल सुविधाओं का लाभ लिया। वहीं 70 बुजुर्ग श्रद्धालुओं ने व्हीलचेयर की सुविधा का इस्तेमाल किया। मेले में बड़ी भीड़ को देखते हुए प्रशासन की ओर से खोया-पाया व्यवस्था भी की गई है। सोमवार को मेले के दौरान 87 लोग अपने परिवार से अलग हो गए थे। प्रशासन ने खोया-पाया व्यवस्था के जरिए सभी को उनके परिजनों से मिलाया। अब तक गया आने वाले तीर्थ यात्रियों की कुल संख्या 4 लाख 60 हजार 200 दर्ज की गई है।
देशभर से पहुंच रहे श्रद्धालु
राजस्थान, गुवाहाटी और देश के कई दूसरे हिस्सों से भी श्रद्धालु गया पहुंच रहे हैं। सभी अपने-अपने पूर्वजों के लिए पिंडदान, श्राद्ध और तर्पण कर रहे हैं। प्रशासन की ओर से मेडिकल सुविधा, व्हीलचेयर और खोया-पाया केंद्र जैसी व्यवस्थाएं की गई हैं, ताकि बड़ी संख्या में पहुंच रहे श्रद्धालुओं को मेले के दौरान परेशानी न हो।
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