DRDO Agni-4 Test : भारत ने अपनी रक्षा प्रणाली को मजबूत करने की दिशा में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। गुरुवार, 6 अगस्त को देश ने मध्यम दूरी की मारक क्षमता वाली बैलिस्टिक मिसाइल ‘अग्नि-4’ का सफल परीक्षण किया। यह परीक्षण ओडिशा के चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (ITR) से स्ट्रेटेजिक फोर्सेस कमांड (SFC) और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। अग्नि-4 भारत की सबसे घातक मिसाइलों में से एक मानी जाती है, जो परमाणु हथियार ले जाने में पूरी तरह सक्षम है।
सभी तकनीकी मानकों पर खरी उतरी अग्नि-4 मिसाइल
रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह परीक्षण स्ट्रेटेजिक फोर्सेस कमांड (SFC) की देखरेख में संपन्न हुआ। प्रक्षेपण के दौरान मिसाइल के सभी परिचालन और तकनीकी मानकों को बारीकी से परखा गया और यह परीक्षण पूरी तरह सफल रहा। मंत्रालय ने पुष्टि की है कि इस सफल टेस्ट ने मिसाइल की विश्वसनीयता और सटीक मारक क्षमता को एक बार फिर साबित कर दिया है। इससे पहले मई महीने में भी भारत ने एमआईआरवी (MIRV) तकनीक से लैस एडवांस्ड अग्नि मिसाइल का सफल परीक्षण किया था।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने SFC और DRDO को दी बधाई
इस ऐतिहासिक सफलता पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया के जरिए स्ट्रेटेजिक फोर्सेस कमांड और डीआरडीओ की पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि अग्नि-4 का सफल प्रक्षेपण अत्याधुनिक तकनीकों के माध्यम से देश की सीमाओं की सुरक्षा करने के भारत के दृढ़ संकल्प को दर्शाता है। राजनाथ सिंह ने इस सफल मिशन को देश की सैन्य ताकत में एक बड़ा मील का पत्थर करार दिया।
क्या हैं अग्नि-4 मिसाइल की मुख्य खूबियां और क्षमता
अग्नि-4 एक मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल (MRBM) है, जिसकी मारक क्षमता लगभग 4,000 किलोमीटर तक है। यह मिसाइल न केवल पारंपरिक बल्कि परमाणु हथियारों को भी अपने साथ ले जाने में सक्षम है। आधुनिक नेविगेशन सिस्टम और उच्च-सटीकता से लैस यह मिसाइल भारत की रणनीतिक प्रतिरोधक क्षमता (Strategic Deterrence) को मजबूत करती है, खासकर चीन जैसे पड़ोसी देशों के संदर्भ में इसे एक बेहद अहम सुरक्षा कवच माना जाता है। दुनिया के गिने-चुने देशों के पास ही इस स्तर की उन्नत मिसाइल तकनीक मौजूद है।
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