Commonwealth Games 2026 में भारत ने जूडो में रचा स्वर्णिम इतिहास: अस्मिता डे और हर्ष सिंह ने जीता Gold

Commonwealth Games 2026

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Commonwealth Games 2026 में भारतीय जूडो खिलाड़ियों ने एक ऐसा प्रदर्शन किया है, जिसे खेल जगत में लंबे समय तक याद रखा जाएगा। भारत की 23 वर्षीय एथलीट अस्मिता डे और 23 वर्षीय हर्ष सिंह ने अपने-अपने वर्ग में शानदार खेल दिखाते हुए गोल्ड मेडल हासिल किया। इन दोनों खिलाड़ियों की ऐतिहासिक जीत के बीच महज 30 मिनट का अंतर रहा। वहीं भारत की प्रतिभाशाली खिलाड़ी यामिनी मौर्य ने भी बेहतरीन खेल दिखाते हुए देश के लिए रजत पदक पक्का किया। एक ही दिन में जूडो मैट पर मिला यह दोहरा स्वर्ण भारत के लिए गर्व का क्षण बन गया है।

Asmita Dey बनीं पहली भारतीय स्वर्ण पदक विजेता 

महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग के फाइनल मुकाबले में अस्मिता डे का सामना कनाडा की हेडी क्वाच से हुआ। फाइनल की शुरुआत में अस्मिता थोड़ा दबाव में नजर आईं, जब उन्होंने पहले युको गंवाया और उन्हें एक पेनल्टी भी मिली। इस वजह से कनाडाई खिलाड़ी मुकाबले में आगे चल रही थीं। लेकिन अस्मिता ने धैर्य नहीं खोया और शानदार वापसी करते हुए मैच को ‘गोल्डन स्कोर’ तक पहुंचा दिया।

गोल्डन स्कोर में अस्मिता ने अपनी रणनीति और फुर्ती से निर्णायक अंक हासिल किया और 36 साल का लंबा इंतजार खत्म कर दिया। इसके साथ ही अस्मिता डे कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में जूडो का स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बन गईं। साल 1990 में ऑकलैंड गेम्स में जूडो को शामिल किए जाने के बाद से भारत ने कई पदक जीते थे, लेकिन सोने का तमगा हमेशा अधूरा रह जाता था, जिसे अस्मिता ने पूरा किया।

Judo में भारत ने रचा स्वर्णिम इतिहास

अस्मिता की ऐतिहासिक जीत के महज आधे घंटे बाद पुरुष 60 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में Harsh Singh ने मैट पर कदम रखा। अपने पहले ही कॉमनवेल्थ गेम्स में खेल रहे हर्ष के सामने ऑस्ट्रेलिया के अनुभवी जूडोका जोशुआ कैट्ज़ थे, जिन्हें इस मुकाबले में स्वर्ण का प्रबल दावेदार माना जा रहा था। हर्ष ने पूरे मैच के दौरान गजब का संयम और रणनीतिक संतुलन दिखाया। 

मैच खत्म होने में जब केवल 41 सेकंड बचे थे, तब हर्ष ने वाजा-आरी के जरिए बढ़त बनाई और अंत तक इसे बनाए रखा। इस जीत के साथ हर्ष कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो का गोल्ड जीतने वाले भारत के पहले पुरुष खिलाड़ी बने। इस ऐतिहासिक सफलता पर देश भर से बधाई संदेश आ रहे हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी दोनों स्वर्ण विजेताओं की जमकर सराहना की है।

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अब यामिनी के मुकाबले पर टिकी देश की निगाहें  

अस्मिता और हर्ष के स्वर्णिम प्रदर्शन के अलावा महिलाओं के 57 किलोग्राम वर्ग में यामिनी मौर्य ने भी बेहतरीन तकनीक और स्टेमिना का परिचय देते हुए फाइनल तक का सफर तय किया और भारत के लिए रजत पदक सुनिश्चित किया। अस्मिता डे का व्यक्तिगत सफर बेहद प्रेरणादायक रहा है। वह त्रिपुरा के दक्षिण त्रिपुरा जिले के बेलोनिया की रहने वाली हैं और एक बेहद साधारण परिवार से आती हैं, जहां उनके पिता साइकिल मैकेनिक का काम करते थे। 

शुरुआती दिनों में 800 मीटर दौड़ से शुरुआत करने वाली अस्मिता ने अपने कोच की सलाह पर जूडो अपनाया। 2015 में त्रिपुरा स्पोर्ट्स स्कूल और फिर 2018 में भोपाल स्थित भारतीय खेल प्राधिकरण के राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र (NCOE) से जुड़कर उन्होंने अपनी प्रतिभा को निखारा। एशियन ओपन और जूनियर एशिया कप के बाद अब कॉमनवेल्थ गेम्स की यह स्वर्णिम सफलता भारतीय जूडो को एक नई ऊंचाई और पहचान दिलाने वाली साबित होगी।

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