देश भर के लाखों युवाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण खबर आई है। लोकसभा से पारित होने के बाद ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक-2026’ गुरुवार को राज्यसभा (Rajya Sabha) में भी पास हो गया है। केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने इस विधेयक को ऊपरी सदन में प्रस्तुत किया। राष्ट्रपति की औपचारिक मंजूरी मिलते ही यह विधेयक कानून का रूप ले लेगा, जिससे देश भर में नकल माफियाओं और पेपर लीक में शामिल गिरोहों पर नकेल कसी जा सकेगी।
राज्यसभा में anti-paper leak bill पास
मानसून सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच चल रहे हंगामे के बीच यह विधेयक Rajya Sabha से पारित हुआ। गुरुवार सुबह सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी दलों के हंगामे के कारण वॉकआउट की स्थिति बनी रही। इसके बाद दोपहर दो बजे जब कार्यवाही फिर से शुरू हुई, तब पीएमओ में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस संशोधन विधेयक को सदन के पटल पर रखा।
विधेयक पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि पारदर्शी और निष्पक्ष परीक्षाएं आयोजित कराने को लेकर सरकार का रुख बिल्कुल स्पष्ट है। पेपर लीक जैसी गंभीर समस्या से कोई भी राज्य अछूता नहीं रहा है, इसलिए इसके खिलाफ सख्त कदम उठाना अनिवार्य था। बहस के दौरान जब विपक्षी सदस्यों की ओर से टिप्पणियां की गईं, तो केंद्रीय मंत्री ने चुटकी लेते हुए कहा कि शायद तीर सही निशाने पर लगा है।
विधेयक की खास बातें
इस नए कानून में परीक्षा में धांधली और पेपर लीक करने वालों के खिलाफ बेहद कड़े दंडात्मक प्रावधान शामिल किए गए हैं। सामान्य मामलों में अनुचित साधनों का प्रयोग करने पर 5 से 10 साल तक की जेल और 50 लाख रुपये तक के जुर्माने की व्यवस्था की गई है। यदि अपराध किसी संगठित गिरोह द्वारा किया जाता है, तो सजा 7 से 10 साल होगी और जुर्माना 10 करोड़ रुपये तक वसूला जाएगा।
परीक्षा कराने वाले सेवा प्रदाताओं और एजेंसियों की गड़बड़ी पर 5 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है तथा उन्हें आठ साल के लिए परीक्षाओं से प्रतिबंधित किया जा सकता है। मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया जाएगा, जिसमें दो महीने के भीतर जांच पूरी होगी और चार्जशीट के तीन महीने के अंदर मुकदमे का फैसला किया जाएगा।
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