Lucknow में फर्जी डिग्री बनाने वाले गैंग का खुलासा, 3 गिरफ्तार

Lucknow

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Lucknow: राजधानी लखनऊ में फर्जी शैक्षणिक डिग्री बेचने वाले इंटरस्टेट गिरोह का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। इस गिरोह का सरगना सत्येंद्र द्विवेदी (32) को उसके दो साथियों के साथ गिरफ्तार किया गया। पुलिस के मुताबिक, यह रैकेट पूरे भारत में फैल चुका था और अब तक इसने लगभग 15 करोड़ रुपए की अवैध कमाई की है। गोमतीनगर में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए फर्जी मार्कशीट और डिग्री बनाने वाले इंटर-स्टेट गिरोह का खुलासा किया है। गोमतीनगर पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। ये सभी साल 2021 से फर्जी डिग्री तैयार कर बेच रहे थे। गिरोह का नेटवर्क कई राज्यों तक फैला हुआ था। पकड़े गए आरोपियों की पहचान अयोध्या के पूरा कलंदर निवासी सत्येंद्र द्विवेदी, उन्नाव के बीघापुर निवासी अखिलेश कुमार और लखीमपुर खीरी के ईशानगर का सौरभ शर्मा के रुप में हुई है। गिरोह का मास्टरमाइंड सत्येंद्र द्विवेदी है।

गिरोह का संचालन और नेटवर्क

  • गिरोह गोमतीनगर लखनऊ से संचालित हो रहा था।

  • साइबर कैफे और निजी ऑनलाइन एग्जाम सेंटर की आड़ में फर्जी मार्कशीट और डिग्रियां तैयार की जाती थीं।

  • यह रैकेट दिल्ली, मुंबई, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड और पूर्वोत्तर राज्यों तक फैला हुआ था।

  • युवाओं को बिना पढ़ाई के डिग्री दिलाने का लालच देकर फंसाया जाता था।

कौन-कौन सी डिग्रियां बनती थीं 

गिरोह पीएचडी, बीटेक, बीसीए, एमसीए, एमबीए, एमएससी, बीए और एमए जैसी डिग्रियां बनाता था।

  • साधारण डिग्री की कीमत: 25 हजार रुपए

  • प्रोफेशनल और उच्च डिग्रियां: 4 लाख रुपए तक

    Lucknow

बरामद सामग्री और दस्तावेज़ 

  • 25 यूनिवर्सिटी के नाम पर तैयार 923 फर्जी डिग्रियां

  • 15 यूनिवर्सिटी की कूटरचित मुहरें

  • 65 डिग्री बनाने वाले विशेष पेपर

  • 6 लैपटॉप, प्रिंटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण

पुलिस ने बताया कि फर्जी डिग्री के आधार पर कई लोग निजी कंपनियों में नौकरी हासिल कर चुके हैं। अब ऐसे लोगों की सूची तैयार कर उन पर भी कार्रवाई की जाएगी।

गिरफ्तार आरोपी और पूछताछ 

  • सत्येंद्र द्विवेदी (32), अयोध्या – गिरोह का सरगना

  • अखिलेश कुमार (44), बीघापुर, उन्नाव

  • सौरभ शर्मा (35), ईसानगर, लखीमपुर खीरी 

पुलिस ने 21 दिसंबर को गोमतीनगर स्थित कैफे में छापेमारी कर तीनों को गिरफ्तार किया। पूछताछ में सामने आया कि वर्ष 2021 से यह गिरोह सक्रिय था और अब तक करीब 1500 लोगों को फर्जी डिग्रियां दी जा चुकी हैं।

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