PM Modi Shares Subhashit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्सर सोशल मीडिया पर कुछ न कुछ ऐसी बातें साझा करते हैं, जो हमें सोचने पर मजबूर कर देती हैं। सोमवार को भी उन्होंने एक बहुत ही सुंदर सुभाषित शेयर किया है, जिसके जरिए यश, सम्मान और देश की भलाई में योगदान देने का संदेश दिया गया है।
पीएम मोदी ने जो संस्कृत श्लोक साझा किया है, वह है— “सुव्याहृतानि धीराणां फलतः परिचिन्त्य यः। अध्यवस्यति कार्येषु चिरं यशसि तिष्ठति॥” इसका सरल शब्दों में अर्थ यह है कि जो इंसान समझदार और बुद्धिमान लोगों की बातों पर गहराई से विचार करता है और फिर पूरी पक्के इरादे के साथ अपने काम में जुट जाता है, वह लंबे समय तक समाज में मान-सम्मान पाता है और देश की तरक्की में अपना हाथ बंटाता है।
सुव्याहृतानि धीराणां फलतः परिचिन्त्य यः।
अध्यवस्यति कार्येषु चिरं यशसि तिष्ठति॥ https://t.co/3RvwoZcqSH
— Narendra Modi (@narendramodi) November 2, 2026
विदुर नीति श्लोक
आप सोच रहे होंगे कि यह श्लोक कहां से आया है? प्रधानमंत्री द्वारा साझा किया गया यह प्रसिद्ध श्लोक हमारे प्राचीन ग्रंथ महाभारत के ‘उद्योग पर्व’ के अंतर्गत आने वाली ‘विदुर नीति’ से लिया गया है। जब महाभारत के युद्ध से पहले धृतराष्ट्र काफी परेशान थे, तब महात्मा विदुर ने उन्हें इसी श्लोक के माध्यम से जीवन की बहुत बड़ी सीख दी थी।
इस श्लोक के जरिए विदुर जी ने राजा धृतराष्ट्र को समझाया था कि एक समझदार शासक या आम इंसान को अपने कर्मों का चुनाव कैसे करना चाहिए। सिर्फ अच्छी बातें सुन लेना ही काफी नहीं होता, बल्कि असली कामयाबी उसे मिलती है जो उन सीखों को अपने जीवन में उतारता है।
राष्ट्र की उन्नति
इस पूरी सीख का सार यही है कि जिंदगी में कोई भी बड़ा फैसला लेने से पहले हमें अपने से बड़ों और अनुभवी लोगों की सलाह जरूर लेनी चाहिए। सिर्फ जोश में आकर बिना सोचे-समझे काम शुरू करने से शायद थोड़े समय की सफलता मिल जाए, लेकिन योजना बनाकर और समझदारी से किए गए काम का यश हमेशा बना रहता है। जब हम सही रास्ते पर चलकर अपने कर्तव्यों को पूरा करते हैं, तो इससे न केवल हमारा खुद का विकास होता है, बल्कि देश और समाज की उन्नति में भी हमारा बड़ा योगदान होता है।







