Gujarat School Mental Health Rules : विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य की सुरक्षा और आत्महत्या जैसी दुखद घटनाओं को रोकने के लिए गुजरात सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। राज्य के माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक स्कूलों (कक्षा 9 से 12) के लिए नए बाध्यकारी नियम लागू कर दिए गए हैं। गुजरात माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (GSHSEB) से संबद्ध स्कूलों में अब 100 या उससे अधिक विद्यार्थियों की संख्या पर कम से कम एक योग्य काउंसलर या मनोवैज्ञानिक नियुक्त करना अनिवार्य होगा। आइए जानते हैं सरकार के इस नए फैसले की मुख्य बातें।
शिक्षा विभाग ने गुजरात माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक शिक्षा विनियम, 1974 में विनियम 16(A) और परिशिष्ट-8 जोड़ा है। यह फैसला मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, शिक्षा मंत्री प्रद्युम्न वाजा और शिक्षा राज्य मंत्री रीवाबा जडेजा के मार्गदर्शन में लिया गया है। सुप्रीम कोर्ट के 15 बाध्यकारी दिशानिर्देशों और NCERT की ‘UMMEED’ (Understand, Motivate, Manage, Empathise, Empower and Develop) गाइडलाइंस को आधार बनाकर ये नियम तैयार किए गए हैं। इसके तहत कम अंकों या खराब प्रदर्शन के आधार पर बच्चों को अलग बैठाने, सार्वजनिक रूप से अपमानित करने या तुलना करके कलंकित करने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
हर शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में प्रत्येक स्कूल में ‘स्कूल वेलनेस टीम’ (SWT) का गठन किया जाएगा। प्रधानाचार्य के नेतृत्व वाली इस टीम में शिक्षक, प्रबंधन प्रतिनिधि और दो विद्यार्थी प्रतिनिधि शामिल होंगे। इन छात्र प्रतिनिधियों को ‘मनो-मित्र’ नाम दिया गया है, जो सहपाठियों को शुरुआती भावनात्मक सहयोग देंगे। 100 से कम छात्रों वाले स्कूलों को पास के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) या ‘टेली-मानस’ (Tele-MANAS) सेवा से संपर्क जोड़ना होगा। इसके अलावा, सभी शिक्षकों व कर्मचारियों के लिए साल में दो बार मानसिक स्वास्थ्य प्रशिक्षण अनिवार्य किया गया है। नियम न मानने या लापरवाही बरतने पर संबंधित स्कूल व अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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