UP SIR 2026 : उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि मतदाता सूची को सही और पारदर्शी रखने के लिए मृत, स्थायी रूप से स्थानांतरित और डुप्लीकेट नामों का सत्यापन जरूरी है। निर्वाचन आयोग के दस्तावेजों के मुताबिक SIR का उद्देश्य पात्र मतदाताओं को शामिल करना और अपात्र प्रविष्टियों को हटाना है।
SIR पर सीएम योगी ने क्या कहा?
सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत रखने के लिए मतदाता सूची का सही होना बेहद जरूरी है। उन्होंने लोगों से अपील की कि मतदाता सूची में दर्ज नामों की जानकारी को ध्यान से देखें और नियमों के अनुसार गलत या अपात्र प्रविष्टियों की पहचान में सहयोग करें। उनके मुताबिक मृत, स्थानांतरित और डुप्लीकेट नामों का सत्यापन प्रक्रिया का अहम हिस्सा है।
उत्तर प्रदेश SIR में किन नामों की होगी जांच?
उत्तर प्रदेश SIR के दौरान मतदाता सूची में शामिल प्रविष्टियों का सत्यापन किया जा रहा है। निर्वाचन आयोग के निर्देशों में मृत, स्थानांतरित, अनुपस्थित और डुप्लीकेट मतदाताओं की संभावित प्रविष्टियों की पहचान का प्रावधान है। साथ ही, प्रक्रिया में दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर भी रखा गया है। यानी अगर किसी पात्र मतदाता का नाम छूटता है या किसी प्रविष्टि को लेकर आपत्ति है, तो निर्धारित प्रक्रिया के तहत उसे सामने रखा जा सकता है।
सीएम योगी ने पहली बार मतदाता बनने जा रहे युवाओं से भी अपील की है। उन्होंने कहा कि 18 साल की उम्र पूरी कर चुके युवाओं को मतदाता सूची में अपना नाम जरूर दर्ज कराना चाहिए। यह अपील इसलिए भी अहम है क्योंकि मतदाता सूची को अपडेट करने के साथ नए पात्र मतदाताओं को जोड़ना भी SIR का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
SIR को लेकर राजनीतिक बहस
SIR को लेकर राजनीतिक दलों के बीच अलग-अलग राय सामने आ रही है। जहां इसके समर्थक मतदाता सूची को अधिक साफ और व्यवस्थित बनाने की बात कह रहे हैं, वहीं विपक्षी दल कुछ प्रविष्टियों के हटने को लेकर सवाल उठा रहे हैं। निर्वाचन आयोग की ओर से कहा गया है कि प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई पात्र मतदाता छूटे नहीं और कोई अपात्र व्यक्ति सूची में शामिल न रहे।
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