Up News : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर से सनातन विरोधी ताकतों और समाज में भ्रम फैलाने वालों पर निशाना साधा है। गोरखपुर के गोरखनाथ मंदिर में आयोजित एक श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने अयोध्या, काशी और विंध्याचल में हुए ऐतिहासिक बदलावों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आज देश में जो सांस्कृतिक पुनर्जागरण दिख रहा है, उससे वो लोग काफी असहज हैं जिन्होंने हमेशा भगवान राम का विरोध किया है। आइए आसान शब्दों में समझते हैं कि मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में क्या-क्या मुख्य बातें कही हैं। गोरखनाथ मंदिर में महंत दिग्विजयनाथ और महंत अवैद्यनाथ की पुण्यतिथि समारोह के दौरान सीएम योगी ने कहा कि अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण कोई अचानक हुई घटना नहीं है। यह सदियों से चले आ रहे एक लंबे आंदोलन और लाखों श्रद्धालुओं के त्याग का परिणाम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अयोध्या का कायाकल्प, काशी विश्वनाथ धाम का जीर्णोद्धार और विंध्याचल धाम का विकास भारत में हो रहे बहुत बड़े सांस्कृतिक बदलाव का प्रतीक है। इन धार्मिक स्थलों के विकास से भारतीय परंपराओं को पूरी दुनिया में एक नई पहचान मिली है।
भ्रम फैलाने वाली ताकतों से सतर्क रहने की अपील
मुख्यमंत्री ने सनातन धर्म के अनुयायियों से ऐसी ताकतों से सावधान रहने का आग्रह किया जो समाज को बांटने और गुमराह करने की कोशिश कर रही हैं।
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कालनेमि का दिया उदाहरण: रामायण के पात्र कालनेमि का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आज के दौर में भी कई लोग धर्म का झूठा चोला पहनकर भ्रम फैला रहे हैं।
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सोशल मीडिया और भ्रामक प्रचार: उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अफवाहों और गलत सूचनाओं पर ध्यान न दें और ऐसी ताकतों के झांसे में आने से बचें।
एकजुटता ही देश की असली ताकत है
सीएम योगी ने देश की 140 करोड़ की आबादी को एकजुट रहने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जब पूरा समाज एक साथ मिलकर आगे बढ़ता है, तो देश की ताकत कई गुना बढ़ जाती है। वहीं, अगर समाज आपस में विभाजित होता है, तो देश कमजोर पड़ता है। उन्होंने ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना को याद दिलाते हुए कहा कि अगर भारत के सभी नागरिक एक लक्ष्य के साथ आगे बढ़ें, तो दुनिया की कोई भी ताकत देश की प्रगति को रोक नहीं सकती।
महंत दिग्विजयनाथ के सामाजिक और शैक्षणिक योगदान को किया याद
अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री ने महंत दिग्विजयनाथ जी के शिक्षा और समाज सेवा के क्षेत्र में दिए गए योगदान को याद किया। उन्होंने बताया कि लगभग एक सदी पहले स्थापित महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद आज भी युवाओं को शिक्षित और संस्कारित करने का काम कर रही है। इसके साथ ही उन्होंने 2019 के प्रयागराज कुंभ और कोरोना काल में वृंदावन में आयोजित वैष्णव कुंभ का जिक्र करते हुए कहा कि विपरीत परिस्थितियों में भी भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराएं कभी नहीं थमीं।



