World Heart Day: विश्व ह्रदय दिवस प्रत्येक वर्ष 29 सितंबर को मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य ह्रदय संबंधी रोगों की रोकथाम और वैश्विक प्रभाव के बारे में जन जागरुकता बढ़ाना है। इस अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य और कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने इस दिवस के बारे में बताते हुए अपने सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को बीमारी के लक्षणों की पहचान करने, स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, जोखिम को नियंत्रित करने और समय पर चिकित्सा सहायता प्राप्त करने की बात कही। जिसके बाद मंत्री ने ह्रदय रोगों की रोकथाम और ह्रदय स्वास्थ्य के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए इस वर्ष का विषय ‘एक भी धड़कन न चूकें’ बताया।
कई कारणों से heart attack का बढ़ता है खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार, तनाव, स्वास्थ्य के लिए हानिकारक खाद्य पदार्थ और खराब जीवनशैली जैसे मुख्य कारण हैं जिनसे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ता है, जिस पर नियंत्रण करने से ह्रदय रोग और अचानक हार्ट अटैक की समस्या से बचा जा सकता है। आजकल के युवा गैजेट्स का इस्तेमाल काफी करते हैं, खासतौर पर मोबाइल को वह देर रात तक चलाते है जिससे उन्हें बचने की आवश्यकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि न सिर्फ अच्छी डाइट और एक्सरसाइज, बल्की ह्रदय को स्वस्थ रखने के लिए अच्छी नींद भी आवश्यक है। देर रात तक न सोना, हफ्तेभर की नींद को छुट्टी वाले दिन पूरा करना शरीर के लिए नुकसानदायक है, नींद के दौरान शरीर को सिर्फ आराम ही नहीं मिलता, बल्कि कई आवश्यक प्रक्रियाएं भी चलती रहती हैं। नई रिसर्च के मुताबिक किसी भी व्यक्ति को कम से कम 7 घंटे की नींद अवश्य लेनी चाहिए।
ह्रदय दिवस पहले 24 सितंबर को मनाया जाता था
विश्व ह्रदय महासंघ (World Heart Federation) ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के सहयोग से वर्ष 1999 में ह्रदय दिवस की घोषणा की, जिसकी परिकल्पना डब्ल्यूएचएफ (WHF) के तत्कालीन अध्यक्ष एंटोनी बेयस डी लूना ने की थी। जिसके बाद दुनिया का पहला विश्व ह्रदय दिवस 24 सितंबर 2000 को मनाया गया था। शुरुआत में यह प्रत्येक वर्ष सितंबर महीने के आखिरी रविवार को मनाया जाता था, लेकिन वर्ष 2011-2012 के दौरान इसे हर वर्ष 29 सितंबर को मनाने का निर्णय लिया गया।
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