Varanasi Ganga Water Level : वाराणसी में पिछले कई दिनों से उफान पर चल रही गंगा नदी के रुख में अब थोड़ा सुधार देखने को मिल रहा है। शहर में गंगा के जलस्तर में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है, जिससे बाढ़ प्रभावित इलाकों के लोगों ने राहत की सांस ली है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार अब गंगा का पानी चेतावनी बिंदु से नीचे आ गया है। वाराणसी में गंगा का जलस्तर 69.82 मीटर दर्ज किया गया। हालांकि जलस्तर घटने से बाढ़ का खतरा तो टल गया है, लेकिन इसके बाद घाटों और तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए एक नई परेशानी खड़ी हो गई है।
वाराणसी में गंगा का जलस्तर
गंगा का पानी जैसे-जैसे पीछे हट रहा है, वैसे-वैसे तटवर्ती क्षेत्रों में जमीनी समस्याएं सामने आने लगी हैं। जलस्तर कम होने से बाढ़ से राहत तो जरूर मिली है, लेकिन घाटों पर जमा मलबा और जलकुंभी अब बड़ी चुनौती बन गई है।
इसके साथ ही मौसम के मिजाज में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। रविवार सुबह शहर का तापमान करीब 32 डिग्री सेल्सियस रहा और हल्की हवाओं के साथ आसमान में बादल छाए रहे। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले तीन दिनों में वाराणसी और आसपास के जिलों में तेज बारिश हो सकती है। अगर ऊपरी इलाकों में बारिश होती है, तो जलस्तर दोबारा बढ़ने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता।
पानी घटने के साथ फैली गंदगी और संक्रामक बीमारियों का खतरा
पानी उतरने के बाद घाटों और निचले रिहाइशी इलाकों में भारी मात्रा में कूड़ा-कचरा, गाद और जलकुंभी जमा हो गई है। सड़ांध और तेज दुर्गंध के कारण स्थानीय निवासियों और वहां पहुंचने वाले लोगों का जीना मुहाल हो गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि घाटों पर बदबू इतनी ज्यादा है कि सांस लेना भी मुश्किल हो रहा है। इसके अलावा जमा हुए गंदे पानी और गंदगी की वजह से संक्रामक बीमारियां और मच्छर जनित रोग फैलने का खतरा तेजी से बढ़ रहा है।
पक्के घाट अब भी जलमग्न, शवदाह में हो रही भारी परेशानी
बाढ़ का असर कम होने के बावजूद काशी के प्रसिद्ध पक्के घाट अभी भी पूरी तरह से सामान्य नहीं हो पाए हैं। कई प्रमुख घाट अब भी पानी में डूबे हुए हैं, जिससे 84 घाटों का आपस में संपर्क टूटा हुआ है।
सबसे ज्यादा दिक्कत श्मशान घाटों पर देखने को मिल रही है। हरिश्चंद्र घाट पर जगह कम पड़ने के कारण लोगों को पास की गलियों में अंतिम संस्कार करना पड़ रहा है। वहीं मणिकर्णिका घाट पर भी शवदाह के लिए ऊपरी हिस्सों का सहारा लेना पड़ रहा है। दूर-दराज से आने वाले परिवारों को इस स्थिति में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
पर्यटन पर पड़ा असर और वरुणा तटवर्ती इलाकों का हाल
घाटों का आपसी संपर्क टूटने और सुरक्षा कारणों से नावों का संचालन फिलहाल बंद रखा गया है। बनारस के घाटों की खूबसूरती देखने और नौका विहार का आनंद लेने आ रहे पर्यटकों को निराश होकर वापस लौटना पड़ रहा है।
दूसरी ओर, वरुणा नदी के किनारे बसे मोहल्लों में स्थिति अभी भी काफी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। कई परिवारों के घरों के निचले हिस्से में पानी भरा हुआ है, जिससे वे दूसरी और तीसरी मंजिल पर रहने को मजबूर हैं। यातायात के लिए नाव ही एकमात्र सहारा है, लेकिन पर्याप्त नावें उपलब्ध न होने से लोगों की दैनिक आवाजाही प्रभावित हो रही है।
प्रयागराज में भी मिली राहत, लेकिन बारिश पर टिकी नजर
वाराणसी के साथ-साथ प्रयागराज में भी गंगा के जलस्तर में अगले 24 घंटों तक गिरावट रहने की संभावना जताई गई है। हालांकि, दिल्ली, मध्य प्रदेश और पूर्वांचल के अन्य हिस्सों में होने वाली बारिश पर आगे की स्थिति निर्भर करेगी।
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