संसद के मॉनसून सत्र (monsoon session) के दौरान पक्ष और विपक्ष के बीच तनातनी कोई नई बात नहीं है, लेकिन जब जनता से जुड़े गंभीर मुद्दों पर बहस की बात आए, तो देश की निगाहें संसद की कार्यवाही पर टिक जाती हैं। हाल के दिनों में Neet परीक्षा में गड़बड़ी, छात्र प्रदर्शनों पर पुलिस कार्रवाई और कई अन्य विषयों को लेकर विपक्षी दल लगातार हंगामा कर रहे हैं। विपक्ष की मांग रही है कि गृह मंत्री खुद सदन में आकर जवाब दें। इस पूरे गतिरोध के बीच केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने अब खुलकर अपनी बात रखी है और विपक्ष को सीधा संदेश दिया है कि सरकार किसी भी मुद्दे पर चर्चा से पीछे नहीं हट रही है।
Amit Shah- संसद में बहस के लिए सरकार पूरी तरह तैयार
Amit Shah ने स्पष्ट किया कि मोदी सरकार संसद के नियम और प्रक्रियाओं के तहत हर विषय पर विस्तार से चर्चा करने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने सोशल मीडिया और मीडिया के माध्यम से कहा कि सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है। यदि विपक्ष वास्तव में गंभीर है, तो उसे लोकसभा अध्यक्ष के पास जाकर चर्चा का औपचारिक समय तय कराना चाहिए। गृह मंत्री ने यहां तक प्रस्ताव रखा कि अगर आवश्यकता पड़े और अध्यक्ष महोदय अनुमति दें, तो सरकार प्रश्नकाल स्थगित करके भी चर्चा शुरू करने के लिए राजी है। उन्होंने साफ कहा कि वे खुद सदन में पूरे समय मौजूद रहेंगे, विपक्ष के हर सदस्य की बात सुनेंगे, उनके सभी बिंदुओं के नोट्स बनाएंगे और एक-एक सवाल का तथ्यात्मक जवाब देंगे।
विपक्ष के रवैये और हंगामे पर उठाए गंभीर सवाल
संसद की कार्यवाही बाधित होने पर गृह मंत्री ने विपक्ष के रवैये पर कड़ा एतराज जताया। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में सार्वजनिक और संसदीय जीवन में ‘लापता’ या ‘भगोड़े’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो बिल्कुल अनुचित है। उन्होंने बताया कि जब से सत्र शुरू हुआ है, वे नियमित रूप से संसद आ रहे हैं और अपने कक्ष में बैठकर कामकाज निपटा रहे हैं। लेकिन जब विपक्ष दोनों सदनों को चलने ही नहीं दे रहा है, तो सदन के भीतर की स्थिति आप समझ सकते हैं। शाह ने आरोप लगाया कि विपक्ष का मकसद देश के सामने सच्चाई लाना या समाधान खोजना नहीं है, बल्कि सिर्फ हंगामा करना और संसद का समय खराब करना है। उन्होंने कहा कि अब देश की जनता को खुद यह तय करना होगा कि कौन सच में बहस चाहता है और कौन चर्चा छोड़कर भाग रहा है।
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छात्रों के मुद्दों और सार्वजनिक चिंताओं पर सरकार का पक्ष
संसद में पिछले कुछ दिनों से नीट परीक्षा, छात्रों के विरोध प्रदर्शन और राम मंदिर से जुड़े आरोपों को लेकर विपक्षी दल नारेबाजी कर रहे हैं। इस पर गृह मंत्री और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू दोनों ने साफ किया कि सरकार इन तमाम सवालों पर अपनी बात रखने में कोई संकोच नहीं कर रही है। गृह मंत्री ने याद दिलाया कि इससे पहले भी लोक परीक्षा से जुड़े कानून पर चर्चा हो चुकी थी, लेकिन उस समय विपक्ष ने अपने विचार रखने के बजाय हंगामा चुना। इसके बावजूद सरकार एक बार फिर छात्रों और युवाओं के हित में पूरी निष्ठा के साथ चर्चा करने को तैयार है।
लोकतांत्रिक मर्यादा और संवाद ही समाधान का रास्ता
किसी भी लोकतांत्रिक देश में समस्याओं का समाधान सड़कों पर नारेबाजी से ज्यादा संसद के भीतर स्वस्थ बहस से निकलता है। अमित शाह के इस बयान ने अब गेंद पूरी तरह से विपक्ष के पाले में डाल दी है। सरकार ने 24 घंटे का समय देकर यह साबित करने का प्रयास किया है कि वह विपक्ष के हर सवाल का सामना करने को तैयार है। अब यह विपक्ष पर निर्भर करता है कि वह संसदीय मर्यादाओं का पालन करते हुए रचनात्मक चर्चा का हिस्सा बनता है या फिर हंगामे की राजनीति को ही प्राथमिकता देता है।







