उत्तर प्रदेश के Sitapur जिले से सरकारी स्कूल में बच्चों को परोसे जाने वाले mid-day meal की बदहाली का एक बड़ा मामला सामने आया है। महमूदाबाद ब्लॉक के एक प्राथमिक विद्यालय में मासूम बच्चों को पानी जैसी पतली सब्जी और जली हुई रोटियां दी जा रही थीं। इस पूरे मामले का वीडियो जैसे ही social media पर सामने आया, हड़कंप मच गया और जिला प्रशासन तुरंत हरकत में आ गया।
Video viral होने के बाद खुला सच
यह मामला महमूदाबाद ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय चंगापुर का है, जहां कक्षा 1 से 5 तक के करीब 63 बच्चे पढ़ते हैं। तय मेन्यू के मुताबिक बच्चों को आलू-तरोई की पौष्टिक सब्जी और ताजा रोटी दी जानी थी। लेकिन बच्चों की थालियों में जो भोजन परोसा गया, उसकी गुणवत्ता बेहद खराब थी।
गांव के प्रधान के बेटे ने जब स्कूल पहुंचकर भोजन वितरण का यह नजारा देखा, तो उन्होंने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया। वीडियो के सामने आते ही बच्चों के अभिभावकों में भारी नाराजगी फैल गई।
प्रशासन का सख्त एक्शन और बर्खास्तगी
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग ने जांच बैठाई, जिसमें जिम्मेदारों की लापरवाही पूरी तरह उजागर हो गई। जांच रिपोर्ट के आधार पर त्वरित कदम उठाते हुए स्कूल की प्रिंसिपल कल्पना वर्मा को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है।
इसके अलावा भोजन बनाने वाली मुख्य रसोइया को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया। वहीं, मिड-डे मील की उचित निगरानी न करने और ढिलाई बरतने के आरोप में संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) के खिलाफ भी प्रतिकूल प्रविष्टि दर्ज करने की कार्रवाई की गई है।
बच्चों की सेहत से समझौता बर्दाश्त नहीं
प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि mid-day meal योजना का मुख्य उद्देश्य केवल बच्चों का पेट भरना नहीं, बल्कि उन्हें गुणवत्तापूर्ण और पौष्टिक खाना उपलब्ध कराना है। स्कूल स्तर पर ऐसी लापरवाही को बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए निगरानी व्यवस्था को और कड़ा करने का दावा किया गया है।
यह भी पढ़ें: NHAI Action on Lucknow-Kanpur Expressway: टोल फ्री हुआ मार्ग, लापरवाह अधिकारी सस्पेंड







