Uttarakhand News : उत्तराखंड में मानसून का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा है। पहाड़ों पर लगातार हो रही मूसलाधार बारिश की वजह से जगह-जगह भूस्खलन और मलबा आने का सिलसिला जारी है। इसका सीधा असर आम जनजीवन और यातायात पर पड़ा है। राज्य में एक राष्ट्रीय राजमार्ग समेत कुल 71 सड़कें बंद हो चुकी हैं। मौसम विभाग ने आने वाले तीन दिनों के लिए राज्य के कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। आइए जानते हैं कि देवभूमि में इस समय क्या स्थिति है।
भूस्खलन और मलबे से थमी रास्तों की रफ्तार
पहाड़ी इलाकों में हो रही लगातार बारिश के कारण लोक निर्माण विभाग (PWD) और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) की कई सड़कें पूरी तरह से बाधित हो गई हैं। मलबा आने से गांवों और कस्बों का संपर्क आपस में कट गया है। हालांकि, संबंधित विभागों की टीमें जेसीबी और अन्य मशीनों की मदद से रास्तों को साफ करने और यातायात को फिर से शुरू करने के काम में दिन-रात जुटी हुई हैं।
चारधाम यात्रा और नदियों के जलस्तर पर नजर
खराब मौसम के बीच भी चारधाम यात्रा को सुचारू रूप से चलाने के प्रयास किए जा रहे हैं। प्रशासन यात्रा मार्गों और संवेदनशील भूस्खलन वाले क्षेत्रों पर कड़ी निगरानी रख रहा है ताकि तीर्थयात्रियों को किसी बड़ी परेशानी का सामना न करना पड़े। राहत की बात यह है कि राज्य की प्रमुख नदियां फिलहाल खतरे के निशान से नीचे बह रही हैं, लेकिन लगातार बारिश की संभावना को देखते हुए SDRF और जिला प्रशासन को अलर्ट पर रखा गया है।
अगले तीन दिन बेहद सतर्क रहने की जरूरत
मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, 26 जुलाई को उत्तरकाशी, देहरादून, नैनीताल और पिथौरागढ़ जिलों में कई जगहों पर तेज बारिश हो सकती है। इसके बाद 27 और 28 जुलाई को भी राज्य के अधिकांश हिस्सों में गरज-चमक के साथ मूसलाधार बारिश होने की आशंका जताई गई है। पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों और पर्यटकों को विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है।
प्रशासन की अपील और जरूरी गाइडलाइन्स
राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने स्थानीय लोगों और यात्रियों से अपील की है कि वे खराब मौसम के दौरान अनावश्यक रूप से यात्रा न करें। पहाड़ी रास्तों पर निकलने से पहले सड़क खुलने या बंद होने की जानकारी जरूर ले लें और उफनते नदी-नालों के पास जाने से बचें। किसी भी आपात स्थिति में तुरंत नजदीकी आपदा नियंत्रण कक्ष से संपर्क करने की सलाह दी गई है।
उत्तराखंड में प्रकृति का यह रुख आने वाले कुछ दिनों तक लोगों की परीक्षा ले सकता है। बारिश और भूस्खलन के इस दौर में सुरक्षा ही सबसे बड़ा बचाव है। अगर आप भी उत्तराखंड या चारधाम यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो मौसम का हाल देखकर ही अपनी यात्रा की तैयारी करें और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पूरी तरह से पालन करें।
यह भी पढ़ें: Dharmendra Pradhan resigns: NEET-UG विवाद के बीच शिक्षा मंत्री ने छोड़ा पद







