Dharmendra Pradhan resigns: देशभर में NEET-UG परीक्षा को लेकर मचे घमासान और दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना त्यागपत्र सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेज दिया है। सोशल मीडिया पर एक चिट्ठी शेयर करते हुए उन्होंने खुद अपने इस फैसले की जानकारी दी और पद छोड़ने की वजह भी खुलकर बताई।
छात्रों के भविष्य के लिए लिया बड़ा फैसला
सोशल मीडिया पर साझा की गई चिट्ठी में उन्होंने लिखा कि वे पिछले चार दशकों से भी ज्यादा समय से छात्रों, शिक्षकों और शिक्षा के क्षेत्र के विकास के लिए समर्पित रहे हैं। उनका मानना है कि एक मजबूत और पारदर्शी शिक्षा व्यवस्था ही देश की प्रगति का आधार होती है। उन्होंने कहा कि हालिया NEET-UG विवाद और उसके बाद की घटनाओं ने उन्हें भीतर से काफी दुखी किया है। वे नहीं चाहते कि किसी भी राजनीतिक खींचतान या कानूनी विवाद की वजह से देश के लाखों छात्रों का भविष्य अधर में लटके।
अनियमितताओं के बाद सरकार ने उठाए थे कदम
अपने पत्र में उन्होंने जिक्र किया कि मई में आयोजित परीक्षा में जैसे ही गड़बड़ी की शिकायतें आईं, सरकार ने तुरंत कड़े कदम उठाए थे। मामले की सीबीआई जांच शुरू कराई गई, गड़बड़ी वाली परीक्षा रद्द कर दोबारा परीक्षा कराने का निर्णय लिया गया और भविष्य में इसे कंप्यूटर आधारित (CBT) मोड में कराने का ऐलान हुआ। लाखों छात्रों की निष्पक्ष परीक्षा कराना उनकी पहली प्राथमिकता थी। दोबारा कराई गई परीक्षा का परिणाम भी आया, जिसमें कई गरीब और प्रतिभाशाली बच्चों को सफलता मिली।
— Dharmendra Pradhan (@dpradhanbjp) July 25, 2026
राजनीति और आरोपों से हुए दुखी
उन्होंने पत्र में लिखा कि परीक्षा प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद कुछ लोगों ने अपने निजी हितों के लिए छात्रों को भ्रमित करने का प्रयास किया। पिछले 10 दिनों में जिस तरह का माहौल बनाया गया, उससे उन्हें काफी ठेस पहुंची है। उन्होंने साफ किया कि यह मामला उनके अपने सम्मान का नहीं, बल्कि लाखों युवाओं के करियर का है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए उन्होंने खुद पीछे हटने का फैसला किया।
पीएम मोदी और सहयोगियों का जताया आभार
पत्र के अंत में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन, मंत्रिमंडल के सहयोगियों और शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि पद पर न रहते हुए भी वे देश के युवाओं, ओडिशा की जनता और भारत माता की सेवा में हमेशा समर्पित रहेंगे। धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा आने के बाद से ही राजनीतिक हलकों और शिक्षा जगत में चर्चाओं का बाजार काफी गर्म हो गया है।
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