Noida Fire: ममूरा की पांच मंजिला इमारत में भीषण हादसा, दो की मौत और कई सुरक्षित बचाए गए

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Noida Fire: नोएडा के ममूरा इलाके से एक बेहद परेशान करने वाली खबर आ रही है। यहां के सेक्टर-66 स्थित एक पांच मंजिला रिहायशी मकान में बुधवार को अचानक भीषण आग लग गई। इस हादसे के वक्त इमारत के अंदर करीब 50 परिवार मौजूद थे, जो वहीं फंस गए। ममूरा के इस Noida Fire हादसे में दम घुटने और झुलसने की वजह से दो लोगों की जान चली गई, जिनमें 26 साल की स्नेहा और एक अज्ञात व्यक्ति शामिल हैं। हालांकि, स्थानीय लोगों और दमकल विभाग की मुस्तैदी से एक बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर 100 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

तंग गलियों के बीच ऐसे बचाई गई लोगों की जान

घटना फेस-3 थाना क्षेत्र के ममूरा गांव की है। रिहायशी इलाका होने के कारण गलियां काफी संकरी थीं, जिससे राहत काम में काफी मुश्किलें आईं। इस Noida Fire हादसे के दौरान जब लोगों को बाहर निकलने का रास्ता नहीं मिला, तो सूझबूझ दिखाते हुए सामने वाली बिल्डिंग से सीढ़ियां जोड़ी गईं। इन सीढ़ियों के सहारे बच्चों और महिलाओं समेत 100 से ज्यादा लोगों को एक-एक करके नीचे उतारा गया। हादसे के वक्त पास के एक दुकानदार अमन ने जैसे ही धुआं देखा, उसने शोर मचाकर सबको सचेत किया, जिससे कई लोग वक्त रहते बाहर भाग सके। सूचना मिलने पर पहुंची फायर ब्रिगेड की गाड़ियों ने काफी मशक्कत के बाद इस Noida Fire पर काबू पाया।

शॉर्ट सर्किट की आशंका और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल

शुरुआती तौर पर इस Noida Fire के पीछे दो मुख्य वजहें मानी जा रही हैं। पहली यह कि ग्राउंड फ्लोर पर खड़ी किसी इलेक्ट्रिक बाइक में शॉर्ट सर्किट हुआ होगा, या फिर किसी फ्लैट के एसी में ओवरलोडिंग की वजह से स्पार्किंग हुई। हालांकि, घटना के बाद पुलिस प्रशासन के रवैये को लेकर स्थानीय लोगों में काफी नाराजगी है। लोगों का आरोप है कि पुलिस ने बिल्डिंग का मुख्य गेट बंद कर दिया है, जिससे वे अपने कीमती सामान और दस्तावेजों को सुरक्षित नहीं निकाल पा रहे हैं। इसके साथ ही, मृतका स्नेहा के भाई के साथ कथित तौर पर हुई पुलिस की धक्का-मुक्की के बाद वहां काफी हंगामा भी हुआ।

इस दर्दनाक Noida Fire हादसे ने एक बार फिर घनी आबादी वाले शहरी गांवों में सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। बिना फायर एनओसी और तंग गलियों में बनी ऐसी बहुमंजिला इमारतें हर वक्त किसी बड़े खतरे को दावत देती हैं। जरूरत है कि प्रशासन ऐसे संवेदनशील इलाकों में बिजली के लोड और सुरक्षा मानकों की गंभीरता से जांच करे ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके।

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