Jagannath Rath Yatra : आस्था और भक्ति का अनूठा उत्सव यानी भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा 16 जुलाई से शुरू होने जा रही है। ओडिशा के पुरी में होने वाले इस बड़े आयोजन में देश-विदेश से 10 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है। इस मौके पर पुरी में जहां पैर रखने की जगह नहीं है, वहीं पश्चिम बंगाल के हावड़ा से सौहार्द की एक ऐसी कहानी आ रही है जो आपका दिल जीत लेगी। आइए जानते हैं कि इस बार रथयात्रा से जुड़ी क्या खास खबरें हैं।
पुरी में उमड़ा जनसैलाब, होटलों के किराए ने तोड़े रिकॉर्ड
अगर आप इस समय पुरी जाने की सोच रहे हैं, तो आपको ठहरने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ सकती है। जिला प्रशासन के मुताबिक, रथयात्रा को लेकर पुरी के लगभग सभी होटल और लॉज 6 महीने पहले यानी फरवरी से ही बुक हो चुके हैं। सबसे ज्यादा मांग उन होटलों की है जिनकी बालकनी या खिड़कियां सीधे रथयात्रा मार्ग की तरफ खुलती हैं। मांग इतनी ज्यादा है कि सामान्य दिनों में 1500 से 2000 रुपए में मिलने वाला कमरा, इस समय तीन दिनों के लिए 50 हजार रुपए तक में मिल रहा है।
हावड़ा में आस्था की अनोखी मिसाल, बिना रथ के परिक्रमा
एक तरफ जहां पुरी में भव्य रथ खींचे जाएंगे, वहीं हावड़ा में एक बेहद अलग परंपरा निभाई जाती है। यहां सेंट पॉल कैथेड्रल मिशन कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. शेख मकबूल इस्लाम भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के विग्रहों को अपनी गोद में लेकर करीब 400 मीटर की यात्रा तय करते हैं। इस यात्रा की खास बात यह है कि इसमें हिंदू, मुस्लिम और ईसाई सभी धर्मों के लोग मिलकर शामिल होते हैं। 1992 से जगन्नाथ संस्कृति पर शोध कर रहे डॉ. शेख का मानना है कि जब हमारा शरीर ही रथ है, तो अलग से किसी लकड़ी के रथ की क्या जरूरत? वे पूरी तरह सात्विक जीवन जीते हैं और भगवान को 35 तरह का भोग भी लगाते हैं।
जगन्नाथ रथयात्रा सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की विविधता और अटूट आस्था का प्रतीक है। पुरी का भव्य नजारा और हावड़ा की यह अनूठी कौमी एकता, दोनों ही रूप दिखाते हैं कि भगवान के प्रति भक्ति के रास्ते कितने अलग और खूबसूरत हो सकते हैं।
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