Catch the Rain campaign: अमृत 2.0 से बदलेगी शहरों की सूरत, जल संरक्षण के लिए उठाए गए ये बड़े कदम

Catch the Rain campaign

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Catch the Rain campaign: बढ़ती गर्मी और कंक्रीट के जंगलों के बीच पानी की किल्लत आज हमारे देश के हर छोटे-बड़े शहर की सबसे बड़ी चिंता बन चुकी है। ऐसे में बारिश की बूंदों को सहेजकर अपने कल को सुरक्षित करना बेहद जरूरी हो गया है। इसी जरूरत को समझते हुए प्रधानमंत्री के "कैच द रेन – जहां वर्षा हो, जब वर्षा हो" अभियान को जमीन पर उतारने के लिए आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय (एमओएचयूए) ने कमर कस ली है। अमृत 2.0 (AMRUT 2.0) योजना के तहत पूरे देश के शहरों में पानी को बचाने, तालाबों को नया जीवन देने और जमीन के गिरते जलस्तर को सुधारने के लिए युद्ध स्तर पर काम शुरू हो गया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस मुहिम में देश के 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लगभग 900 से अधिक शहरी स्थानीय निकाय पूरी सक्रियता के साथ जुड़े हुए हैं।

Catch the Rain campaign 

यह अभियान सिर्फ एक सरकारी योजना नहीं है, बल्कि पानी की हर एक बूंद को सहेजने का एक सामूहिक संकल्प है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मानसून के दौरान जब भी और जहां भी बारिश हो, उस पानी को बहकर बर्बाद होने से बचाया जा सके। शहरों में तेजी से हो रहे निर्माण कार्य के कारण बारिश का पानी जमीन के अंदर नहीं जा पाता है, जिससे भूजल का स्तर लगातार गिरता जा रहा है। इस समस्या के समाधान के लिए इस अभियान के तहत वर्षा जल संचयन (रेनवाटर हार्वेस्टिंग) को बढ़ावा दिया जा रहा है।

इसके जरिए शहरों की खाली जमीनों, सरकारी इमारतों और घरों की छतों पर ऐसी प्रणालियां विकसित की जा रही हैं, जिससे बारिश का पानी सीधे जमीन के भीतर जाकर संचित हो सके और आने वाले समय में पानी की कमी को दूर किया जा सके।

AMRUT 2.0 

इस पूरे बदलाव के पीछे AMRUT 2.0 (अटल मिशन फॉर रिजुवेनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन) की बहुत बड़ी भूमिका है। इस मिशन के तहत न केवल घरों तक साफ पानी पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है, बल्कि जल सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए जल स्रोतों के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके अंतर्गत देश के विभिन्न शहरों में लगभग 1.21 लाख एकड़ के जल निकायों का कायाकल्प किया जा रहा है।

इस काम में पुराने तालाबों और झीलों से गाद (मिट्टी) निकालना, पानी के आने-जाने के रास्तों को दुरुस्त करना और उनके किनारों को सुरक्षित बनाना शामिल है। ऐसा करने से तालाबों की पानी रोकने की क्षमता बढ़ेगी, जिससे न केवल आसपास का भूजल स्तर सुधरेगा, बल्कि बरसात के दिनों में शहरों में आने वाली बाढ़ जैसी स्थितियों से भी राहत मिलेगी।

जल संरक्षण  

इस पूरी मुहिम का मुख्य केंद्र बिंदु जल संरक्षण ही है। भविष्य की पीढ़ियों को पानी के संकट से बचाने के लिए मंत्रालय ने शहरों में हरियाली बढ़ाने पर भी जोर दिया है। इसके तहत देश के शहरी इलाकों में करीब 12,750 एकड़ में हरित क्षेत्रों और खूबसूरत पार्कों का विकास किया जा रहा है। ये पार्क और ग्रीन बेल्ट केवल घूमने-फिरने के लिए नहीं हैं, बल्कि ये प्रकृति के स्पंज की तरह काम करते हैं। जब बारिश होती है, तो ये हरे-भरे क्षेत्र पानी को सोखकर सीधे जमीन के नीचे पहुंचाने का काम करते हैं। इसके साथ ही, ये शहरों के बढ़ते तापमान को नियंत्रित करने और पर्यावरण को साफ-सुथरा रखने में भी बड़ी मदद कर रहे हैं।

भूजल पुनर्भरण 

जमीन के नीचे छिपे पानी के खजाने को फिर से भरने के लिए यानी भूजल पुनर्भरण के लिए तकनीकी और वैज्ञानिक तरीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। जल शक्ति अभियान (Jal Shakti Abhiyan) के साथ मिलकर 79 बड़े नगर निगमों में लगभग 1.99 लाख से अधिक और अन्य छोटे शहरों में 73 हजार से ज्यादा रिचार्ज स्ट्रक्चर बनाए जा रहे हैं। इसके तहत ‘उथले जलभृत प्रबंधन’ (SAM) जैसी उन्नत तकनीकों का सहारा लिया जा रहा है। जैसे कि पश्चिम बंगाल के बर्दवान और आंध्र प्रदेश के विजयनगरम में खास बोरवेल वाले रिचार्ज पिट्स बनाए गए हैं, जो पानी को सीधे गहराई तक पहुंचाते हैं।

वहीं, अरुणाचल प्रदेश के ईटानगर (Itanagar) में छतों पर पानी जमा करने के सिस्टम बनाए गए हैं। छत्तीसगढ़ के कोरबा और तेलंगाना के वारंगल जैसे शहरों में तो मानसून शुरू होने से पहले ही ये सारी तैयारियां पूरी कर ली गई थीं ताकि इस सीजन की बारिश का एक-एक कतरा जमीन में उतारा जा सके। 

जल शक्ति अभियान  

जल शक्ति अभियान–जन भागीदारी 2.0 के जरिए इस पूरे मिशन को लोगों के आंदोलन में बदलने की कोशिश की जा रही है। जब तक आम जनता पानी बचाने के इस प्रयास से खुद को नहीं जोड़ेगी, तब तक कोई भी बदलाव पूरी तरह सफल नहीं हो सकता। सरकार और स्थानीय प्रशासन के साथ-साथ आम नागरिकों, स्कूलों और सामाजिक संस्थाओं को भी इस अभियान का हिस्सा बनाया जा रहा है ताकि पानी की बर्बादी को रोका जा सके और जल संचयन को रोजमर्रा की आदत बनाया जा सके।

शहरी इलाकों में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करना आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत बन गया है। सरकार द्वारा अमृत 2.0 और कैच द रेन के माध्यम से किए जा रहे ये प्रयास बेहद सराहनीय हैं। वैज्ञानिक तरीकों से भूजल स्तर को सुधारने और जल निकायों को पुनर्जीवित करने से हमारे शहरों का भविष्य सुरक्षित होगा। लेकिन इसके साथ ही हमें यह भी समझना होगा कि पानी की बचत केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है। आज बचाई गई पानी की हर एक बूंद हमारे आने वाले कल के लिए सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण निवेश है।

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