Bankipur byelection: BJP का बड़ा दांव, चुनावी मैदान में अब नया उम्मीदवार

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Bankipur byelection: Bihar की सियासत में इस समय पटना की बांकीपुर (Bankipur) सीट सबसे बड़ा हॉटस्पॉट बनी हुई है। यहां होने वाले आगामी उपचुनाव को लेकर हर दिन नए सियासी समीकरण बन और बिगड़ रहे हैं। इसी बीच बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में भाजपा ने बड़ा राजनीतिक फैसला लिया है, जिसने इस चुनावी मुकाबले को और भी ज्यादा दिलचस्प बना दिया है। पार्टी ने अचानक अपने घोषित उम्मीदवार को बदलते हुए संगठन के एक बेहद जमीनी कार्यकर्ता को चुनावी मैदान में उतारने का दांव खेला है। इस अप्रत्याशित फैसले के बाद से पटना के राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार काफी गर्म हो गया है।

Bankipur byelection : ऐन वक्त पर बदला उम्मीदवार

भाजपा ने पहले इस सीट से युवा नेता अभिषेक सिन्हा उर्फ अभिषेक बंटी को अपना प्रत्याशी घोषित किया था, जिन्होंने अपना नामांकन भी दाखिल कर दिया था। लेकिन अचानक Abhishek Banti ने पारिवारिक कारणों का हवाला देते हुए चुनाव न लड़ने की इच्छा जताई और अपना नामांकन वापस ले लिया। उम्मीदवार के पीछे हटने के बाद पार्टी के सामने तुरंत नया चेहरा ढूंढने की बड़ी चुनौती थी।

इसके बाद भाजपा ने तेजी से नई रणनीति पर काम किया और वरिष्ठ नेताओं के मंथन के बाद Neeraj Kumar Sinha के नाम पर मुहर लगा दी गई। भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह ने नीरज को पार्टी का आधिकारिक उम्मीदवार बनाने का पत्र भी जारी कर दिया है।

बूथ अध्यक्ष से सीधे चुनावी मैदान तक का सफर

BJP के नए प्रत्याशी Neeraj Kumar Sinha की कहानी काफी दिलचस्प है और वे पूरी तरह से एक कैडर आधारित नेता माने जाते हैं। मीठापुर के पोस्टल पार्क इलाके के रहने वाले नीरज वर्तमान में भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के जिला उपाध्यक्ष हैं और साथ ही वे दूसरी बार नरेंद्र भारती मंडल के मंडल अध्यक्ष के रूप में भी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

32 वर्षीय अविवाहित नीरज ने साल 2006 में भाजपा की प्राथमिक सदस्यता ली थी। उन्होंने संगठन में एक छोटे से बूथ अध्यक्ष से अपने सफर की शुरुआत की थी और आज वे विधानसभा के प्रत्याशी बने हैं। उनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि भी काफी पुरानी है; उनके चाचा स्वर्गीय नरेंद्र भारती जनसंघ के समय से ही भाजपा के सक्रिय नेता रहे थे।

प्रशांत किशोर की मौजूदगी से मुकाबला हुआ कड़ा

Bankipur सीट हमेशा से भाजपा का एक मजबूत गढ़ रही है, जहां पिछले तीन दशकों से पार्टी का एकतरफा कब्जा रहा है। यह सीट बीजेपी के वरिष्ठ नेता नितिन नवीन के राज्यसभा जाने के बाद खाली हुई है। लेकिन इस बार का उपचुनाव सामान्य नहीं है, क्योंकि चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर की ‘जन सुराज पार्टी’ भी इस चुनाव में पूरे दमखम के साथ उतरी है। प्रशांत किशोर के सीधे मैदान में आ जाने से यह मुकाबला त्रिकोणीय और बेहद कड़ा हो गया है। ऐसे में भाजपा के लिए अपने इस पुराने शहरी दुर्ग को बचाए रखने के साथ-साथ जीत के पुराने अंतर को बरकरार रखने की भी एक बड़ी परीक्षा होने वाली है।

अभिषेक बंटी के अचानक हटने के बाद नीरज कुमार सिन्हा को टिकट देकर भाजपा ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि पार्टी अपने समर्पित और जमीनी कार्यकर्ताओं को कभी भी बड़ा मौका दे सकती है। इस हाई-प्रोफाइल सीट पर अब सबकी नजरें टिकी हुई हैं कि एक जमीनी कार्यकर्ता का यह नया चेहरा प्रशांत किशोर की चुनौती और विपक्ष के हमलों के सामने कमल खिलाने में कितना कामयाब हो पाता है।

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