Firozabad Aarav Case: उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद (Firozabad) से न्याय की एक ऐसी मिसाल सामने आई है, जिसने कानून व्यवस्था पर जनता का भरोसा और मजबूत कर दिया है। फिरोजाबाद कोर्ट का फैसला इस समय हर तरफ चर्चा में है, जहां एक डेढ़ साल के मासूम बच्चे आरव (Aarav) की जान लेने वाले आरोपी को अदालत ने मौत की सजा सुनाई है। इस पूरे मामले में सबसे बड़ी बात यह रही कि कोर्ट और पुलिस दोनों ने बिना समय गंवाए इतनी तत्परता दिखाई कि पीड़ित परिवार को बहुत जल्द न्याय मिल गया।
Firozabad Aarav Case: एकतरफा प्यार में ले ली मासूम की जान
यह दर्दनाक घटना बीती 30 मई 2026 को शिकोहाबाद की यादव कॉलोनी में हुई थी। बदायूं के रहने वाले आरोपी विराज पाठक को बच्चे की मां रति से एकतरफा प्यार था। रति का अपने पति के साथ विवाद चल रहा था और विराज ने कानूनी मदद के बहाने उससे नजदीकियां बढ़ाई थीं।
जब उसे लगा कि डेढ़ साल का मासूम Aarav उसके रास्ते का रोड़ा बन रहा है, तो वह उसे चॉकलेट दिलाने के बहाने बाहर ले गया। इसके बाद उसने मासूम की निर्दयी हत्या कर दी। उसने बच्चे को सड़क पर कई बार पटका, जिससे उसकी मौत हो गई। यह पूरी घटना गली में लगे एक सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हो गई थी, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर आने के बाद लोगों का गुस्सा भड़क उठा था।
पुलिस की तत्परता और पुख्ता सबूत
इस जघन्य अपराध के बाद पुलिस प्रशासन तुरंत हरकत में आया। घटना के महज 5 घंटे के भीतर पुलिस ने आरोपी विराज को एक मुठभेड़ के दौरान गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। शिकोहाबाद पुलिस ने साइंटिफिक तरीकों का इस्तेमाल करते हुए सीसीटीवी फुटेज की जांच कराई और उसे पुख्ता सबूत के तौर पर तैयार किया। पुलिस ने सिर्फ एक हफ्ते के भीतर 80 पन्नों की मजबूत चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर दी थी। पुलिस की इसी फुर्ती की वजह से अदालत में केस कमजोर नहीं पड़ा और आरोपी को बचने का कोई मौका नहीं मिला।
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गवाहों की गवाही और फांसी की सजा
फास्ट ट्रैक कोर्ट की कार्रवाई इस पूरे मामले में बेहद मिसाल बनकर उभरी है। जिला जज डॉ. बब्बू सारंग की अदालत में इस मुकदमे की सुनवाई सिर्फ 40 दिनों तक चली। इस दौरान बच्चे को बचाने और घटना को अपनी आंखों से देखने वाले 13 गवाहों ने अदालत में बिना डरे अपने बयान दर्ज कराए। मासूम की मां और नानी लगातार आरोपी के लिए फांसी की मांग कर रही थीं। आखिरकार, अदालत ने आरोपी विराज को दोषी मानते हुए उसे फांसी की सजा सुना दी। इस फैसले के बाद बच्चे की मां और नानी ने अदालत के प्रति आभार जताया है।
यह फैसला समाज में अपराधियों के लिए एक बड़ा सबक है। जब पुलिस और न्यायपालिका मिलकर इस तरह तेजी से काम करते हैं, तो अपराधियों में खौफ पैदा होता है। सिर्फ 40 दिनों के भीतर मिला यह न्याय यह साबित करता है कि कानून के राज में मासूमों के साथ दरिंदगी करने वालों के लिए कोई जगह नहीं है।







