America के कैलिफोर्निया से एक बेहद दुखद और बड़ी खबर सामने आई है। यहां के मशहूर एडवर्ड्स एयरफोर्स बेस पर सोमवार सुबह अमेरिकी वायुसेना का एक दिग्गज B-52 बॉम्बर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस भीषण हादसे में विमान के परखच्चे उड़ गए और उसमें सवार सभी 8 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। वायुसेना के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि यह विमान एक नियमित परीक्षण उड़ान (टेस्ट मिशन) पर था, जो उड़ान भरने के कुछ ही सेकेंड बाद मरुस्थलीय इलाके में गिरकर आग का गोला बन गया।

एडवर्ड्स एयरफोर्स बेस
यह दर्दनाक हादसा लॉस एंजिलिस से करीब 161 किलोमीटर उत्तर में स्थित एडवर्ड्स एयरफोर्स बेस पर सुबह करीब 11:20 बजे हुआ। यह बेस अमेरिकी वायुसेना के नए विमानों, आधुनिक हथियार प्रणालियों और सॉफ्टवेयर की टेस्टिंग का सबसे प्रमुख केंद्र माना जाता है।
हादसे के वक्त यह विशालकाय विमान अपने रडार आधुनिकीकरण कार्यक्रम के तहत उड़ान भर रहा था। विमान में वायुसेना के जवानों के साथ-साथ सरकार और विमान निर्माता कंपनी बोइंग के विशेषज्ञ भी सवार थे। क्रैश इतना भीषण था कि आसमान में कई मील दूर तक काले धुएं का गुबार देखा गया। घटना के तुरंत बाद पूरे एयरफील्ड को बंद कर दिया गया और वहां आने वाली अन्य उड़ानों को दूसरे बेस की तरफ डायवर्ट कर दिया गया।

कंट्रोल सिस्टम में खराबी की आशंका
हादसे की असल वजह का पता लगाने के लिए वायुसेना ने जांच शुरू कर दी है, लेकिन शुरुआती तौर पर कंट्रोल सिस्टम में खराबी की आशंका जताई जा रही है।
मशहूर विमानन सुरक्षा विशेषज्ञ जेफ गुजेटी ने इस घटना पर अपनी राय देते हुए कहा कि विमान जिस तरह टेकऑफ के तुरंत बाद ऊंचाई पकड़े बिना सीधे नीचे गिरा, उससे साफ लगता है कि यह ‘कंट्रोलेबिलिटी’ यानी नियंत्रण की समस्या थी। विमानन सुरक्षा विशेषज्ञ जेफ गुजेटी के मुताबिक, यह मेंटेनेंस में हुई कोई चूक, इंजन की अचानक आई कोई बड़ी खराबी या फिर टेस्ट किए जा रहे नए डिजिटल रडार उपकरण के फेल होने का नतीजा हो सकता है। उन्होंने यह भी साफ किया कि परीक्षण उड़ानें हमेशा सामान्य उड़ानों से ज्यादा जोखिम भरी होती हैं।
अमेरिकी वायुसेना के इतिहास में B-52 बॉम्बर को सबसे भरोसेमंद लड़ाकू विमानों में गिना जाता है, जो 1950 के दशक से सेवा में है। ऐसे में इस आधुनिक टेस्ट फ्लाइट के दौरान हुआ यह हादसा अमेरिकी सेना के लिए एक बहुत बड़ा झटका है। हालांकि जांच टीम को ब्लैक बॉक्स और मलबे की पूरी पड़ताल करने में कुछ महीनों का समय लग सकता है, लेकिन इस त्रासदी ने सैन्य परीक्षणों में छिपे खतरों को एक बार फिर दुनिया के सामने ला दिया है।
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