Yogi Ki Pati: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अक्सर उन लोगों को पीछे छोड़ देते हैं जिन्होंने हमें चलना सिखाया। इसी गंभीर विषय पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य के लोगों के नाम एक बहुत ही संवेदनशील और भावुक चिट्ठी लिखी है। इस विशेष पत्र को 'योगी की पाती' नाम दिया गया है। विश्व वृद्धजन दुर्व्यवहार जागरूकता दिवस के मौके पर लिखी गई इस चिट्ठी में उन्होंने हमारे परिवारों में अकेले पड़ रहे बुजुर्गों के दर्द को बयां किया है। उन्होंने सभी को याद दिलाया है कि हमारी भारतीय संस्कृति में बुजुर्गों का स्थान भगवान के बराबर माना गया है, लेकिन आज की हकीकत थोड़ी परेशान करने वाली है।
जब घर सूने होने लगें और वृद्धाश्रम बढ़ने लगें
अपनी इस विशेष पाती में मुख्यमंत्री ने समाज के बदलते स्वरूप पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने सीधे जनता से संवाद करते हुए लिखा कि आज हमारे घरों में सन्नाटा बढ़ रहा है और वृद्धाश्रमों की संख्या बढ़ती जा रही है। यह एक ऐसी सच्चाई है जो किसी भी संवेदनशील इंसान के दिल को दुखा सकती है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर आज हमारा समाज इस मोड़ पर क्यों पहुंच गया है?
सनातन परंपरा में माता-पिता और गुरु को साक्षात ईश्वर का दर्जा दिया गया है। ऐसे में बुजुर्गों का आदर-सत्कार करना केवल एक नियम या संस्कार नहीं है, बल्कि यह हमारी उस गौरवशाली सभ्यता की पहचान है जिस पर हम सब गर्व करते हैं।
बदलते दौर में अकेलेपन से जूझते हमारे अपने
आज के समय में युवाओं की जीवनशैली काफी बदल चुकी है। बेहतर भविष्य और नौकरी के चक्कर में बच्चों को अपने घर-गांव से दूर शहरों या दूसरे राज्यों में जाना पड़ता है। ऐसे में माता-पिता जिन्होंने अपना पूरा जीवन बच्चों के सुनहरे भविष्य के लिए दांव पर लगा दिया, वे उम्र के आखिरी पड़ाव पर बिल्कुल अकेले रह जाते हैं। कई बार तो इच्छा होने के बावजूद घर में उनकी देखभाल करने के लिए कोई मौजूद नहीं होता।
बुढ़ापे के इस समय में बुजुर्गों को सबसे ज्यादा जरूरत किसी आर्थिक मदद की नहीं, बल्कि अपनेपन और दो मीठे बोल की होती है। बड़े ही दुख की बात है कि आज समाज में कई जगहों पर बुजुर्गों को अपनों का ही खराब व्यवहार सहना पड़ रहा है। हालात इतने बिगड़े हैं कि देश की सबसे बड़ी अदालत को भी समाज को उन नैतिक जिम्मेदारियों की याद दिलानी पड़ रही है, जो स्वाभाविक रूप से हमारे खून में होनी चाहिए।

पुराणों और इतिहास के जरिए बड़ी सीख
मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि हमारी धार्मिक कथाएं हमें हमेशा माता-पिता की सेवा का संदेश देती हैं। उन्होंने भगवान गणेश और कार्तिकेय की उस प्रसिद्ध कथा का जिक्र किया, जिसमें पूरे ब्रह्मांड के चक्कर लगाने की शर्त रखी गई थी। तब गणेश जी ने अपनी बुद्धिमत्ता और अटूट श्रद्धा का परिचय देते हुए केवल अपने माता-पिता के चक्कर लगा लिए थे। उन्होंने यह संदेश दिया कि माता-पिता के चरणों में ही सारे लोक और सारे तीर्थ समाए हुए हैं। इसी सुंदर सोच की वजह से उन्हें सबसे पहले पूजे जाने का अधिकार मिला।
इसके साथ ही उन्होंने श्रवण कुमार की मातृ-पितृ भक्ति और भगवान श्रीराम के जीवन को भी याद किया, जिन्होंने अपने पिता के वचनों को पूरा करने के लिए बिना किसी हिचकिचाहट के 14 साल का वनवास चुन लिया था। सनातन धर्म बड़ों के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लेने की सीख देता है क्योंकि वे हमारे जीवन के अनुभवों की असली पूंजी हैं।
बुजुर्गों और महिलाओं की सुरक्षा के लिए सरकारी प्रयास
केवल सामाजिक अपील ही नहीं, बल्कि सरकार के स्तर पर भी बुजुर्गों और निराश्रित महिलाओं के सम्मान को बनाए रखने के लिए कई बड़े फैसले लिए गए हैं। सरकार ने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि समाज का यह हिस्सा आर्थिक रूप से किसी पर निर्भर न रहे।
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पेंशन में सहायता: बुजुर्गों और बेसहारा महिलाओं को सम्मान से जीने का हक मिले, इसलिए सरकार की तरफ से 1,500 रुपये प्रति माह की पेंशन दी जा रही है।
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मुफ्त इलाज का भरोसा: निराश्रित महिलाओं को बीमारी के समय किसी के आगे हाथ न फैलाना पड़े, इसके लिए उन्हें आयुष्मान भारत योजना और मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना से जोड़ा जा रहा है।
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सिर पर पक्की छत: आर्थिक रूप से कमजोर और बेसहारा महिलाओं को प्रधानमंत्री आवास योजना और मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत पक्के मकान का लाभ भी दिया जाएगा।
सेहत को बेहतर बनाने का एक वैश्विक संकल्प
चिट्ठी के अंत में मुख्यमंत्री ने राज्य के सभी बुजुर्गों से बड़े आदर के साथ एक खास अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि आपने अपने जीवन का सबसे अच्छा समय अपने परिवार और समाज को सुधारने में लगा दिया, अब थोड़ा समय खुद के लिए भी निकालें।
उन्होंने याद दिलाया कि इस साल 21 जून को मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की मुख्य थीम भी ‘स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग’ चुनी गई है। यह सिर्फ एक लिखने-बोलने की थीम नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया के बुजुर्गों को एक स्वस्थ, सुरक्षित और गरिमापूर्ण जीवन देने का एक बड़ा संकल्प है। इसलिए सभी बुजुर्गों को अपने शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को अच्छा रखने के लिए योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा जरूर बनाना चाहिए।
‘योगी की पाती’ वास्तव में हम सभी के लिए एक जरूरी संदेश है। सरकार नीतियां बनाकर आर्थिक मदद और मुफ्त इलाज की व्यवस्था तो कर सकती है, लेकिन बुजुर्गों को जो सम्मान और मानसिक सुकून चाहिए, वह केवल उनके अपने बच्चे और परिवार ही दे सकते हैं। आधुनिक बनने की होड़ में हमें यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि हमारी असली ताकत हमारे पारिवारिक मूल्य ही हैं।
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